• News
    • देश
    • दुनिया
  • sports
    • क्रिकेट
    • फूटबाल
    • बैडमिंटन
    • कुश्ती
    • बास्केटबॉल
    • हॉकी
    • बेसबाल
  • Lifestyle
    • फैशन
    • ब्यूटी
    • हेल्थ
  • Entertainment
    • बॉलीवुड
    • टी वी
    • हॉलीवुड
    • म्यूजिक
  • Technology
    • गैजेट्स
    • इन्टरनेट
    • मोबाइल
  • Business
  • Articles
    • English
    • Hindi
Himcom News
Himcom News

August 9th, 2026
  • News
    • देश
    • दुनिया
  • sports
    • क्रिकेट
    • फूटबाल
    • बैडमिंटन
    • कुश्ती
    • बास्केटबॉल
    • हॉकी
    • बेसबाल
  • Lifestyle
    • फैशन
    • ब्यूटी
    • हेल्थ
  • Entertainment
    • बॉलीवुड
    • टी वी
    • हॉलीवुड
    • म्यूजिक
  • Technology
    • गैजेट्स
    • इन्टरनेट
    • मोबाइल
  • Business
  • Articles
    • English
    • Hindi
  • Follow
    • Facebook
    • Twitter
0 comments Share
You are reading
   आंतरिक विघटन का आप के सामने खतरा?  
   आंतरिक विघटन का आप के सामने खतरा?   
Home
Articles
Hindi

   आंतरिक विघटन का आप के सामने खतरा?  

May 16th, 2017 urvashi Goel Articles, Hindi 0 comments

  • Tweet
  • Share 0
  • Skype
  • Reddit
  • +1
  • Pinterest 0
  • LinkedIn 0
  • Email

विष्णुगुप्त

(वरिष्ठ पत्रकार)

अरविन्द केजरीवाल ने सोचा तक नहीं होगा कि उनके उपर भी भ्रष्टचार का बम फूट सकता है। अब तक तो वे दूसरों के सिर पर भ्रष्टचार का बम फोडते थे और कहते थे कि पूरी दुनिया भ्रष्ट हैं,  एक हम ही हैं जो ईमानदार हैं,  भ्रष्टचार हम ही मिटा सकते हैं। भ्रष्टचार का बम अरविन्द केजरीवाल के सिर पर भाजपा या कांग्रेस वाले फोडते तो कहा जा सकता था कि यह एक साजिश है और आरोपों में कोई दम नहीं है। भ्रष्टचार का बम तो उनकी पार्टी के ही बडे नाम वाले नेता कपिल मिश्रा ने फोड़ा है जो एक दिन पूर्व तक अरविन्द केजरीवाल के मंत्रिमंडल में शामिल थे। कपिल मिश्रा ने कहा है कि बदनाम मंत्री सत्येन्द्र जैन से दो करोड़ रूपये लेते हुए उन्होंने अपने आंखों से देखा है। कहने के लिए अरविन्द केजरीवाल यह कह सकते हैं कि मंत्री पद से हटा दिया, इसीलिए  कपिल मिश्रा ने उन पर आरोप लगाये हैं।

kejriwal

प्रतिक्रिया जैसी हुई है उसी देखते हुए यह कहा जा सकता है कि अरविन्द केजरीवाल की कथित तौर पर ईमानदार छवि पर दाग लग ही गया है,  अब अरविन्द केजरीवाल दूसरों को भ्रष्ट कैसे कह सकते हैं। कभी उनकी पार्टी में रहे योगेन्द्र यादव और प्रशांत भूषण जैसे लोग कथित तानाशाही और सत्ता के लालच के खिलाफ पहले से ही गर्म थे और ये अरविन्द केजरीवाल के लिए मुसीबत खड़ी कर रहे थे। अब अन्ना हजारे अपनी चिंता जता रहे हैं। अन्ना हजारे का कहना है कि भ्रष्टाचार की बात सुनकर उन्हें दुख हुआ है और अरविन्द केजरीवाल ने तानाशाही और सत्ता से जुडे रहने के लालच में एक महान आंदोलन को तहस-नहस कर दिया। शायद अरविन्द केजरीवाल को उत्पन्न राजनीतिक परिस्थितियों का भान नहीं होगा पर सच्चाई यह है कि अरविन्द केजरीवाल लगातार उन लोगों से ही घिरते जा रहे हैं जिन्होंने अन्ना और लोकपाल आंदोलन में साथ दिया था और जिनके बदौलत अरविन्द केजरीवाल मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे थे। आम आदमी पार्टी विखरने के कगार पर खडी है। देखना यह होगा कि आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली बच पायेगी या नहीं? आतंरिक विरोध और आंतरिक विखंडन का शिकार होकर आम आदमी पार्टी खुद बेमौत भी मर सकती है।

कथित भ्रष्टचार के खिलाड़ी खुद भ्रष्टचार का शिकार हो गया। अरविन्द केजरीवाल ही अपने आप को आरोप लगाने के खिलाड़ी मानते रहे हैं। अरविन्द केजरीवाल ने कभी यह समझने की कोशिश ही नहीं की कि सिर्फ आरोप लगा देने मात्र से कोई व्यक्ति अपने आप को महान नहीं कह सकता है, अपने आप को भ्रष्टचार विरोधी नायक नहीं बना सकता है। आरोप लगा देने मात्र से ही कोई व्यक्ति या राजनीतिज्ञ भ्रष्ट साबित नहीं हो जाता है? किसी को भ्रष्ट साबित करने के लिए सबूत चाहिए,  सबूत भी चाकचैबंद होने चाहिए, चाकचैबंद सबूत ही कोर्ट में परीक्षण के दौरान सही पाये जाते हैं। सतही और अप्रमाणित आरोपों की हवा निकलती देर नहीं लगती है। अरविन्द केजरीवाल के सतही और अप्रमाणित आरोपों की हवा कोई एक बार नहीं बल्कि बार-बार निकली है। इन्होंने तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के खिलाफ भ्रष्टचार के आरोप लगाये थे और बड़े नाम कमाये थे, मीडिया इन्हें भ्रष्टचार विरोधी नायक करार दे डाला। अरविन्द केजरीवाल के आरोपों के खिलाफ नितिन गडकरी कोर्ट चले गये, मानहानि का मुकदमा ठोक दिया। केजरीवाल ने जमानत न लेने का जमकर नाटक किया। बाद में केजरीवाल ने माफी मांग ली। अरूण जेटली का प्रकरण भी आपको याद है। अरूण जेटली के खिलाफ अरविन्द केजरीवाल और उनकी पार्टी ने खूब धमाल चौकड़ी मचायी थी। अरूण जेटली से मंत्री पद छोडने के लिए भी मांग की थी। अरूण जेटली ने भी अरविन्द कजेरीवाल के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा ठोक दिया। जब मुकदमा शुरू हुआ तब केजरीवाल उनकी पार्टी फंसती हुई नजर आयी। राम जेठमलानी जैसे वकील रखने के बावजूद कोर्ट में अरविन्द केजरीवाल और उनकी पार्टी के अन्य लोगों को सबूत पेश करना मुश्किल हो रहा है। अब अरविन्द केजरीवाल कहना शुरू कर दिया कि उन्हेांने अरूण जेटली पर वही आरोप लगाये थे जो मीडिया में बहुत पहले से चल रहा था। इससे साफ होता है कि अरूण जेटली के खिलाफ अरविन्द केजरीवाल या उनकी पार्टी के पास कोई ठोस सबूत नहीं थे फिर भी इन्होंने अरूण जेटली के खिलाफ भ्रष्टचार के आरोप लगाये थे। अरविन्द केजरीवाल ने शीला दीक्षित के खिलाफ भी कई आरोप लगाये थे। जिनमें टैंकर घोटाला कुख्यात था। पर केजरीवाल ने अभी तक शीला दीक्षित के भ्रष्टचार के खिलाफ कोई कानूनी कार्यवाही शुरू नहीं कर सके।

सत्ता में आने के बाद भी केजरीवाल झूठे भ्रष्टचार के आरोपों और सनसनी फैलाने की कहानी गढते रहे। इनकी महत्वाकांक्षा प्रधानमंत्री की कुर्सी पर चली गयी। लगे नरेन्द्र मोदी के खिलाफ ताल ठोकने। चले गये मोदी के खिलाफ चुनाव लडने वाराणसी। वाराणसी की जनता ने इन्हें खारिज कर दिया। लौटकर फिर ये दिल्ली आ गये। दिल्ली की जनता ने दुबारा इन्हे सत्ता सौंपी थी। सत्ता इसलिए सौंपी थी कि केजरीवाल किये गये वायदों को पूरा करेंगे, दिल्ली का विकास करेंगे, सरकारी कार्यालयों में चल रहे भ्रष्टचार को समाप्त करेंगे। वाराणसी की जनता द्वारा खरिज करने के बाद भी अरविन्द केजरीवाल ने अपनी अति महात्वांकाक्षा पर रोक नहीं लगायी। अपने आप को नरेन्द्र मोदी के विकल्प के तौर पर प्रस्तुत कर दिया। संवैधानिक जिम्मेदारियों के साथ न्याय नही हुआ। संवैधानिक माप-दंडों की लगातर खिल्लियां उडायी। यह जानते हुए कि दिल्ली एक पूर्ण राज्य नहीं है, पूर्ण राज्य नहीं होने के कारण दिल्ली के मुख्यमंत्री को वैसे अधिकार नहीं है जो पूर्ण राज्य के होते हैं। दिल्ली में उप राज्यपाल के अधिकार अधिक होते हैं। इस संवैधानिक सच्चाई को ये स्वीकार ही नहीं कर पायें। कभी नरेन्द्र मोदी तो कभी उपराज्यपाल को गाली देने का काम इनका टूटा ही नहीं। सारी शक्ति इन्होंने मोदी और उपराज्यपाल को गाली देने में लगा दी तो फिर काम करने की शक्ति और समय इनके पास ही नहीं था। दिल्ली की जनता की इच्छाओं के अनरूप कार्य हुए नहीं। एक-एथ थाली का बिल पन्द्रह-पन्द्रह हजार के प्रकरण से इनके आम आदमी होने की हवा भी निकली थी।

दिल्ली को छोड़कर केजरीवाल पंजाब और गोवा फतह करने चले गये। खासकर पंजाब में इन्होंने खूब नाटक किया। खूब राजनीतिक पैंतरेबाजी दिखायी। चुनाव जीतने के लिए सिख आतंकवादियों से भी मिल लिये। पंजाब की शांति को भी भंग करने की कोशिश की थी। पंजाब और गोवा की जनता ने अरविन्द केजरीवाल की इच्छाओं पर तुषाराघात कर दिया। पंजाब में कुछ हासिल तो हुआ पर गोवा की सभी सीटों पर आप के प्रत्याशियों के जमानत जब्त हो गयी थी। दिल्ली एमसीडी के चुनाव में भी केजरीवाल ने बड़ी जोर मारी थी। भाजपा यहा दस साल से सत्ता में थी, इसलिए भाजपा के खिलाफ हवा भी थी। लेकिन दिल्ली की जनता केजरीवाल के नाटकों से आजित आ चुकी थी। दिल्ली की जनता को काम करने की जगह राजनीतिक रार खडा करने की नीति पंसद नहीं थी। दिल्ली की जनता ने अरविन्द केजरीवाल की पार्टी को पसंद करने की जगह भाजपा को पसंद करने में ही अपनी भलाई समझी थी। चुनाव में हार को भी स्वीकार करने की परमपरा है। पर केजरीवाल ने ईबीएम पर ठिकरा फोड कर अपनी कूनीति से बाज नहीं आये।

यह भी सही है कि केजरीवाल के साथ जुडे लोग कोई प्रतिबद्ध विचारधारा के लोग नहीं रहे हैं। दो तरह के लोग इनके साथ रहे हैं। एक तो राजनीतिक अनाडी थे और दूसरे तरह के लोगों में वैसे लोग शामिल थे जिन्हें किसी भी पार्टी में कोई मजबूत जगह नहीं मिली थी और  वे राजनीतिक तौर पर हाशिये पर ही खडे थे। अरविन्द केजरीवाल, मनीष सिसौदिया और गोपाल राय जैसे लोग खुद एनजीओवाद से प्रेरित थे जो देश की गरीबी और देश की विंसगतियों बेचकर विदेशों से पैसा लाकर मौज करते रहे हैं।

निष्कर्ष यह है कि अब अरविन्द केजरीवाल को अपनी पार्टी को एक रखना कठिन होगा। आप पार्टी में भगदड़ मच सकती है। अगर आप पार्टी में भगदड़ मचती है और विधायक आप पार्टी से भागते हैं तो फिर आम आदमी पार्टी की सरकार गिर भी सकती है, आम आदमी पार्टी बेमौत मर सकती है। एक आंदोलन से निकले सपने का सर्वानाश होते हम सब देख रहे हैं और आगे भी देखेंगे।

 

  • Tweet
  • Share 0
  • Skype
  • Reddit
  • +1
  • Pinterest 0
  • LinkedIn 0
  • Email
0%

Summary

  • Tags
  • Article
  • Arvind Kejriwal
  • hImcomnews
  • Problem
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest WhatsApp
Next article ए किड लाइक जेक में काम कर सकती हैं प्रियंका चोपड़ा?
Previous article परम प्यार से हुए अलग

urvashi Goel

Related Posts

Articles

Assam Floods 2026: A State Fighting Nature's Fury

The 2026 floods in Assam have once again highlighted the state's annual struggle with one of India's most...
Articles

जयपुर आयुषी शर्मा केस: एक ऐसा मामला जिसने सबको हैरान कर दिया

 राजस्थान की राजधानी जयपुर का आयुषी...
Articles

ART AS ACTIVISM

When entertainment becomes a social voice. We usually think of art as something that entertains us. A...

Leave a Reply Cancel reply

You must be logged in to post a comment.

Weekly Timeline
Jul 29th 5:06 PM
Articles

Assam Floods 2026: A State Fighting Nature’s Fury

Jul 24th 12:57 PM
Articles

जयपुर आयुषी शर्मा केस: एक ऐसा मामला जिसने सबको हैरान कर दिया

Jul 16th 3:33 PM
Articles

ART AS ACTIVISM

Jul 15th 5:21 PM
Articles

अभिषेक बंटी का टिकट क्यों कटा आख़िर क्या कारण रही होगी? 

Jul 14th 3:50 PM
Articles

JANTAR MANTAR PROTEST (CJP)

Mar 13th 1:35 PM
Articles

LPG सिलेंडर को लेकर संसद के बाहर विपक्ष का विरोध प्रदर्शन

Dec 10th 3:48 PM
Articles

College Life and Digital Distractions

Weekly Quote

I like the dreams of the future better than the history of the past.

Thomas Jefferson
  • News
  • sports
  • Lifestyle
  • Entertainment
  • Technology
  • Business
  • Articles
  • Back to top
© Himcom News 2017. All rights reserved.
Managed by Singh Solutions