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जानिए क्यों नहीं मिली थी इंदिरा गांधी को जगन्नाथ मंदिर में जाने की इजाजत?
जानिए क्यों नहीं मिली थी इंदिरा गांधी को जगन्नाथ मंदिर में जाने की इजाजत?
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जानिए क्यों नहीं मिली थी इंदिरा गांधी को जगन्नाथ मंदिर में जाने की इजाजत?

November 18th, 2019 kaushlendra raj Shukla Articles, Hindi, राजनीति 0 comments

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18 नवंबर 2019 कौशलेंद्र राज शुक्ला

उड़ीसा अपने जगन्नाथ मंदिर के लिए पूरे विश्व भर में प्रसिद्ध है, आप भारत के किसी भी कोने में रहते हैं, आप की एक बार यह इच्छा जरूर रही होगी कि आप उड़ीसा जाएं और जगन्नाथ मंदिर के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त करें।इस मंदिर की भव्य वास्तुकला को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं ।लेकिन शायद आपको इस मंदिर से जुड़े कुछ रोचक तत्व नहीं पता होंगे। तो चलिए आज आपको विस्तार से बताते हैं कि आखिर क्या कुछ रोचक कहानियां इस मंदिर से जुड़ी हुई हैं। वर्ष 1984 में जब इंदिरा गांधी भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री थी तब उन्होंने इस मंदिर में जाने की इच्छा जताई थी।लेकिन मंदिर प्रशासन ने उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया था क्योंकि वह गैर हिंदू धर्म से संबंध रखती थी।ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इस मंदिर में सिर्फ सनातन हिंदुओं के प्रवेश की अनुमति है मतलब आप सनातन धर्म के हैं तो ही आप इस मंदिर में प्रवेश पा सकते हैं।इस मंदिर का प्रशासन सिर्फ हिंदू बौद्ध जैन और सिख धर्मों के लोगों को मंदिर में प्रवेश की अनुमति देता है ।इस बात से आप अंदाजा लगाइए कि भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री को इस मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली थी।यानी कि अगर आप भारत के प्रधानमंत्री ही क्यों ना हो अगर आप हिंदू नहीं है तो आपको जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलेगी।आपको बता दें कि इंदिरा गांधी की शादी फिरोज गांधी से हुई थी जो कि एक पारसी थे इसलिए विवाह के बाद वह तकनीकी रूप से हिंदू नहीं रहे और यही वजह थी कि उन्हें इस मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली।तब से लेकर आज तक गांधी परिवार का कोई भी व्यक्ति जगन्नाथ मंदिर में घुसने की हिमाकत नहीं कर सके।राहुल गांधी अपनी हिंदुत्व वाली छवि चमकाने के लिए चार धाम की यात्रा करते हैं तो कैलाश मानसरोवर भी जाते हैं लेकिन न कभी जगन्नाथ मंदिर जाने की बात कहते हैं और ना ही कभी जगन्नाथ मंदिर का जिक्र करते हैं। आप यह जानकर हैरान होंगे ।कि वर्ष 2005 में थाईलैंड की महारानी को भी यहां प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई थी। वैसे तो वह बौद्ध धर्म से संबंध रखती थी, लेकिन एक विदेशी बौद्ध होने के कारण उनको यहां पर प्रवेश की इजाजत नहीं दी गई।वर्ष 2006 में न्यूजीलैंड के एक नागरिक ने एक करोड़ 78 लाख रुपए जगन्नाथ मंदिर को दान दिए थे ,लेकिन इसाई होने की वजह से उनको भी इस मंदिर में प्रवेश होने की अनुमति नहीं मिली थी। मतलब साफ है आप चाहे पैसे वाले हो या आपके पास राजनीतिक सकती हो लेकिन अगर आप गैर हिंदू धर्म से संबंध रखते हैं तो आप जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश नहीं पा सकेंगे। यहां पर किसी का भी वर्चस्व नहीं वर्चस्व नहीं चलता। महमूद गजनवी द्वारा आपने सोमनाथ मंदिर को लूटने की कहानी तो कई बार सुनी होगी लेकिन शायद आपने जगन्नाथ मंदिर के इतिहास के बारे में नहीं सुना होगा।भारत का संविधान हमें खुले तौर पर किसी भी धर्म को अपनाने का हक देता है फिर आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यों है आखिर क्यों जगन्नाथ मंदिर में गैर हिंदुओं को जाने की अनुमति नहीं है तो चलिए आपको बता दें कि यह कड़वा सच है कि पिछले हजार वर्षों में बादशाहों और सुल्तानों के राज्य में कई मंदिरों को तोड़ा गया अयोध्या में राम जन्मभूमि और मथुरा में कृष्ण जन्म भूमि इसी इतिहास से जुड़े हैं। जिनमें से भगवान जगन्नाथ मंदिर भी एक है मुस्लिम बादशाहों और सुल्तानों ने इस मंदिर पर कुल 17 बार हमला किया और इसी कारण वर्ष इस मंदिर की मूर्तियों को कई बार मंदिर से दूसरी जगह ले जाया गया। और यही कारण है कि इस मंदिर में गैर हिंदू धर्म के लोगों का प्रवेश वर्जित है।

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