भारत के 562 रियासतों और राजे रजवाड़ों को भारतीय गणतंत्र में जोड़ने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल की 143 वीं जयंती के अवसर पर गुजरात के नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध पर बनी यह मूर्ति यह सात किलोमीटर दूर से ही नज़र आती हैं. 182 मीटर की दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा स्टैचू ऑफ़ यूनिटी को आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनावरण किया. इससे पहले चीन की स्प्रिंग बुद्ध सबसे ऊंची प्रतिमा थी.
इसकी ऊंचाई 153 मीटर है. इसके बाद जापान में बनी भगवान बुद्ध की प्रतिमा का नंबर आता है जो 120 मीटर ऊंची है. तीसरे नंबर पर न्यूयॉर्क की 93 मीटर ऊंची स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी है. जिसे बनाने में पांच साल से भी अधिक समय लगा. न्यूयॉर्क के स्टैचू ऑफ़ लिबर्टी से दोगुनी स्टैचू ऑफ़ यूनिटी को 1 नवंबर को आम जनता के लिए खोल दिया जायेगा. नर्मदा जिले में इस सेट को जाने माने डिजाइनर नितिन देशाई ने तैयार किया हैं, जोधा अकबर का सेट भी नितिन ने बनाया था. इस प्रतिमा को बनाने के लिए लार्सन एंड टुर्बो ने साल 2014 में स्टैचू ऑफ़ यूनिटी बनाने का ठेका मिला था. इस समारोह को खास बनाने के लिए कई ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चारण किया और 33 नदियों के जल से शिवलिंग का जलाभिषेक किया उसके बाद सरदार पटेल की प्रतिमा को प्रधानमंत्री मोदी ने अनावरण किया.

20 से ज्यादा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 900 कलाकारों ने प्रस्तुति दी. समारोह को और भव्य बनाने के लिए एयर शो किया गया. शिल्पकार राम सुतार काफी खुश हैं की उसकी मेहनत को अब दुनिया देखेगी. सरदार पटेल की मूर्ति में दो लिफ्ट हैं जो प्रतिमा के सीने तक पहुँचेगी जहाँ से दर्शक गैलेरी और बहार की नज़ारे भी देख सकेंगे. सेल्फी पॉइंट भी बनाया गया हैं बतौर इस प्रतिमा को देखने के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग शनिवार से शुरू हो गई हैं. प्रति व्यक्ति 350 रूपए का टिकट रखा गया हैं. मूर्ति से तीन किलोमीटर दूर एक टेंट सिटी भी बनायीं गयी हैं, टेंट सिटी में 52 कमरों का श्रेष्ठ भारत भवन 3 स्टार होटल हैं जहाँ दर्शक रात भर रुक सकते हैं और आम लोगों के लिए स्टैचू ऑफ़ यूनिटी 1 नवंबर को खुलेगा. स्टैचू ऑफ़ यूनिटी को बनाने में पांच साल से कम का भी समय लगा जिसकी लागत लगभग 2990 करोड़ रूपए लगे. जिसमें 85 प्रतिशत ताम्बें का इस्तेमाल किया गया. सरदार पटेल का चेहरा 30 फ़ीट की बनी हैं जो थ्रीडी तकनीक से बनाये गए हैं. पटेल की प्रतिमा के होंठ, आंखें और जैकेट के बटन 6 फीट के इंसान के कद से बड़े हैं. इसमें 70 फीट लंबे हाथ हैं, पैरों की ऊंचाई 85 फीट से ज्यादा है. इसे बनाने में 3400 मजदूरों और 250 इंजीनियरों ने लगभग 42 महीने काम किया. इसी बीच पटेल की मूर्ति के अनावरण के समय 22 गावों के सरपंच ने इस प्रतिमा का विरोध करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखा हैं.







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