रमजान के पाक महीने के बाद ईद का त्यौहार विश्व भर में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. मुस्लिम समुदाय के लोग 30 दिनों तक बिना कुछ खाए पिए रोज़ रखने के बाद एक दूसरे को गले मिलकर ईद उल फितर की मुबारक बाद देते हैं.
ईद उल फितर को मीठी ईद के रूप मे भी जाना जाता है. हिजरी कैलेंडर के अनुसार दसवें महीने शव्वाल के पहले दिन ये त्यौहार दुनिया भर में मनाया जाता हैं. इस्लामी कैलेंडर में ये महीना चांद देखने के साथ शुरू होता है. जब तक चांद नजर नहीं आता तब तक रमज़ान का महीना खत्म नहीं माना जाता. इस तरह रमजान के आखिरी दिन चांद रात को चांद दिख जाने पर जशन मनाया जाता हैं और अगले दिन बेहद उत्साह और उलास के साथ ईद मनाई जाती है. ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन हजरत मुहम्मद मक्का शहर से मदीना के लिए निकले थे. मक्का से मोहम्मद पैगंबर के प्रवास के बाद पवित्र शहर मदीना में ईद-उल-फितर का उत्सव शुरू हुआ. माना जाता है कि पैगम्बर हजरत मुहम्मद ने बद्र की लड़ाई में जीत हासिल की थी.
पैगम्बर ने करवाया मुंह मीठा
जीत की खुशी में सबका मुंह मीठा करवाया गया था, इसी दिन को मीठी ईद या ईद-उल-फितर के रुप में मनाया जाता है. पैगम्बर हजरत मुहम्मद ने बताया है कि उत्सव मनाने के लिए अल्लाह ने कुरान में पहले से ही 2 सबसे पवित्र दिन बताए हैं. जिन्हें ईद-उल-फितर और ईद-उल-जुहा कहा गया है. इस प्रकार ईद मनाने की परंपरा अस्तित्व में आई. ईद का त्योहार सबको साथ लेकर चलने का संदेश देता है. ईद पर हर मुसलमान चाहे वो आर्थिक रुप से संपन्न हो या न हो, सभी एकसाथ नमाज पढ़ते हैं और एक दूसरे को गले लगाते हैं. कुरान में ज़कात अल-फ़ित्र को अनिवार्य बताया गया है. जकात यानी दान को हर मुसलमान का फर्ज कहा गया है. ये गरीबों को दिए जाने वाला दान है.
जरूरतमंदों की करें मदद
परंपरागत रूप से इसे रमज़ान के अंत में और लोगों को ईद की नमाज़ पर जाने से पहले दिया जाता है. मुस्लिम अपनी संपत्ति को पवित्र करने के रूप में अपनी सालाना बचत का एक हिस्सा गरीब या जरूरतमंदों को कर के रूप में देते हैं. ईद की शुरुआत सुबह दिन की पहली नमाज़ के साथ होती है. जिसे सलात अल-फ़ज़्र भी कहा जाता है. इसके बाद पूरा परिवार कुछ मीठा खाता है. वैसे ईद पर खजूर खाने की परंपरा है. फिर नए कपड़ों में सजकर लोग ईदगाह या एक बड़े खुले स्थान पर जाते हैं, जहां पूरा समुदाय एक साथ ईद की नमाज़ अदा करता है. प्रार्थना के बाद, ईद की बधाईयां दी जाती है. उस समय ईद-मुबारक कहा जाता है. ये एक दूसरे के प्यार और आपसी भाईचारे को दर्शाता है.
ईद-उल-फितर की खास दावत
ईद-उल-फितर के मौके पर एक खास दावत तैयार की जाती है. जिसमें खासतौर से मीठा खाना शामिल होता है. इसलिए इसे भारत और कुछ दक्षिण एशियाई देशों में मीठी ईद भी कहा जाता है. ईद-उल-फितर पर खासतौर से सेवइयां यानी गेहूं के नूडल्स को दूध के साथ उबालकर बनाया जाता है और इसे सूखे मेवों और फलों के साथ परोसा जाता है.
Anishka Maheshwari (BJMC II)











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