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रामनवमी विशेष:-राम तो घर-घर में हैं, राम हर आंगन में हैं मन से रावण जो निकाले, राम उसके मन में हैं -रामनवमी की शुभकामनाएं!
रामनवमी विशेष:-राम तो घर-घर में हैं, राम हर आंगन में हैं मन से रावण जो निकाले, राम उसके मन में हैं -रामनवमी की शुभकामनाएं!
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रामनवमी विशेष:-राम तो घर-घर में हैं, राम हर आंगन में हैं मन से रावण जो निकाले, राम उसके मन में हैं -रामनवमी की शुभकामनाएं!

April 2nd, 2020 Nitish Pathak Articles, Breaking News, Hindi, News, देश 0 comments

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02 April 2020, Nitish Pathak

आज रामनवमी है। भगवान श्री राम के जन्म उत्सव। कोरोना वायरस को लेकर देशव्यापी लॉकडाउन में भी रामनवमी पर्व को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। हालांकि, संक्रमण से बचने के लिए सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए भी लोग दिखाई दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं।
हिन्दू धर्म में चैत्र मास की शुक्लपक्ष नवमी को रामनवमी का त्योहार मानाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के 7वें अवतार भगवान राम का जन्म हुआ था। भगवान श्रीराम के पृथ्‍वी पर आगमन का दिन बेहद फलदायी माना गया है। इस दिन मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है।
पौराणिक ग्रंथों में जो कथाएं हैं उनके अनुसार भगवान राम त्रेता युग में अवतरित हुए। उनके जन्म का एकमात्र उद्देश्य मानव मात्र का कल्याण करना, मानव समाज के लिए एक आदर्श पुरुष की मिसाल पेश करना और अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना करना था। यहां धर्म का अर्थ किसी विशेष धर्म के लिए नहीं बल्कि एक आदर्श कल्याणकारी समाज की स्थापना से है।

राजा दशरथ जिनका प्रताप 10 दिशाओं में व्याप्त रहा। उन्होंने तीन विवाह किए थे लेकिन किसी भी रानी से उन्हें पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई। ऋषि मुनियों से जब इस बारे में विमर्श किया तो उन्होंने पुत्रेष्टि यज्ञ करवाने की सलाह दी। पुत्रेष्टि यज्ञ करवाने के पश्चात यज्ञ से जो खीर प्राप्त हुई उसे राजा दशरथ ने अपनी प्रिय पत्नी कौशल्या को दे दिया।
कौशल्या ने उसमें से आधा हिस्सा केकैयी को दिया इसके पश्चात कौशल्या और केकैयी ने अपने हिस्से से आधा-आधा हिस्सा तीसरी पत्नी सुमित्रा को दे दिया। इसीलिए चैत्र शुक्ल नवमी को पुनर्वसु नक्षत्र एवं कर्क लग्न में माता कौशल्या की कोख से भगवान श्री राम जन्मे। केकैयी से भरत ने जन्म लिया तो सुमित्रा ने लक्ष्मण व शत्रुघ्न को जन्म दिया।  
भगवान श्री राम को मर्यादा का प्रतीक माना जाता है। उन्हें पुरुषोत्तम यानि श्रेष्ठ पुरुष की संज्ञा दी जाती है। वे स्त्री पुरुष में भेद नहीं करते। अनेक उदाहरण हैं जहां वे अपनी पत्नी सीता के प्रति समर्पित व उनका सम्मान करते नज़र आते हैं। वे समाज में व्याप्त ऊंच-नीच को भी नहीं मानते। शबरी के झूठे बेर खाने का और केवट की नाव चढ़ने का उदाहरण इसे समझने के लिए सर्वोत्तम है।

वेद शास्त्रों के ज्ञाता और समस्त लोकों पर अपने पराक्रम का परचम लहराने वाले, विभिन्न कलाओं में निपुण लंकापति रावण के अंहकार के किले को ध्वस्त करने वाले पराक्रमी भगवान श्री राम का जन्मोत्सव देश भर में धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री राम की भक्ति में डूबकर भजन कीर्तन किए जाते हैं।

श्री रामकथा सुनी जाती है। रामचरित मानस का पाठ करवाया जाता है। श्री राम स्त्रोत का पाठ किया जाता है। कई जगहों भर भगवान श्री राम की प्रतिमा को झूले में भी झुलाया जाता है। रामनवमी को उपवास भी रखा जाता है। मान्यता है कि रामनवमी का उपवास रखने से सुख समृद्धि आती है और पाप नष्ट होते हैं।

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