21दिसंबर 2019 उपेन्द्र कुमार पासवान
मोदी सरकार नेशनल पापुलेशन रजिस्टर एनपीआर की ओर कदम बढ़ा रही है-सूत्रों के हवाले से खबर है कि अगले हफ्ते मंगलवार को होने वाली कैबिनेट की मीटिंग में नेशनल पापुलेशन रजिस्टर के अपडेशन और जनगणना को मंजूरी मिल सकती है।
नागरिकता संशोधन कानून और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन प्रदेश भर में मचे घमासान के बीच मोदी सरकार नेशनल पापुलेशन रजिस्टर की ओर कदम बढ़ा रही है।केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसके लिए कैबिनेट से 3941 करोड रुपए की मांग भी की है। एनपीआर का उद्देश्य देश के समान निवासियों का व्यापक पहचान डाटा बेस बनाना है।इस डेटाबेस में जनसंख्या की के साथ बायोमेट्रिक जानकारी है।
हालांकि CAA और NRC की तरफ गैर बीजेपी शासित राज्य इसका भी विरोध कर रहे हैं और इसमें सबसे आगे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी है और एनआरसी को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली ममता बनर्जी ने तो बंगाल में एनपीआर पर जारी कम को भी रोक दिया है।
इसके अलावा केरल की लेफ्ट सरकार ने भी एनपीआर से संबंधित सभी कार्यवाही रोकने का आदेश दिया है.मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि सरकार ने एनपीआर को स्थगित रखने का फैसला किया है क्योंकि आशंका है कि इसके जरिए एनआरसी लागू की जाएगी।
क्या है एनपीआर
NPR देश के सभी सामान निवासियों का दस्तावेज है और नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों के तहत स्थानीय उप जिला जिला राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है. कोई भी निवासी जो 6 महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में निवास कर रहा है तो उसे NPR में अनिवार्य रूप से पंजीकरण करना होता है. 2010 सी सरकार ने देश के नागरिकों की पहचान का डेटाबेस जमा करने के लिए इसकी शुरुआत की इसे 2016 में सरकार ने जारी किया था।







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