आसान भाषा में बताया जाए तो इस कानून का मतलब है कि भारत देश में सभी धर्मो, समुदायों के लिए
कानून एक समान होगा। समान नागरिक संहिता भारत के संविधान के अनुच्छेद 44 का हिस्सा हैं। जो राज्य
की नीति के निदेशक तत्व (Directive principles of state policy- DPSP) का अंग है। इसमे कहा गया है कि
राज्य पूरे भारत में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक सहिंता सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे।

समान नागरिक सहिंता कब लागू हुई
समान नागरिक सहिंता 1962 में लागू हुई। इस सहिंता की जड़े 1867 के पुर्तगाली नागरिक सहिंता में
मिलती हैं, जिसे पुर्तगालियों द्वारा लागू किया गया था। भारतीय राज्य गोवा को तत्कालीन पुर्तगालियों गोवा
और दमन में औपनिवेशिक शासन के कारण भारत से अलग कर दिया गया था तब एक सामान्य पारिवारिक
कानून को बरक़रार रखा गया था जिसे गोवा नागरिक संहिता के रूप में जाना जाता था और इस प्रकार यह
आज तक समान नागरिक संहिता वाला भारत एकमात्र राज्य है। समान नागरिक संहिता (UCC) का लक्ष्य सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून ढांचा लागू करना है चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। अभी विवाह,
तलाक और उत्तराधिकार सहित मामले धर्म -आधारित व्यक्तिगत कानून द्वारा सुरक्षित होते हैं
Chaya
BAJMC







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