पटना। तेजाब कांड में बाहुबली नेता और आरजेडी के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की उम्रकैद की सजा पटना हाईकोर्ट ने बरकरार रखी है। अदालत ने शहाबुद्दीन के अलावा राजकुमार साह, मुन्ना मियां और शेख असलम की भी ताउम्र की सजा को बरकरार रखा है।

उल्लेखनीय है कि सीवान की स्पेशल कोर्ट ने तेजाब कांड में शहाबुद्दीन को दो साल पहले ही सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में शहाबुद्दीन ने याचिका दायर की थी। पटना हाईकोर्ट ने बुधवार को अपना फैसला सुनाया। अदालत ने इसी साल 30 जून को शहाबुद्दीन की सजा पर निर्णय सुरक्षित रख लिया था।
सिवान की विशेष अदालत ने तेजाब हत्याकांड पर 11 सितंबर 2015 को फैसला सुनाया था जिसमें शहाबुद्दीन, राजकुमार शाह, मुन्ना मियां और शेख असलम को उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी। 16 अगस्त 2004 को सीवान थाने में कलावती देवी ने मुकदमा दर्ज कराया था जिसमें कहा गा था कि उसके दो बेटों पर तेजाब डालकर हत् कर दी गई। साथ ही उसके तीसरे बेटे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटनाक्रम के अनुसार 16 अगस्त 2004 को सीवान के कारोबारी चंदा बाबू एक पंचायत में जमीन विवाद के मामले में मौजूद थे। इसी पंचायत में उन्हें मारने की धमकी देने के साथ कुछ लोगों ने उनसे मारपीट भी की थी। बाद में कुछ लोग उसके घर आ गये लेकिन चंदा बाबू ने अपने घर में रखे तेजाब को बदामाशों पर फेंककर खुद की और परिवार के सदस्यों की जान बचाई थी। इसी दिन शाम को चंदा बाबू के दो बेटों गिरीश और सतीश को अगवा कर लिया गया और सीवान शहर के मध्य चौराहे पर तेजाब डालकर उनकी हत्या कर दी गई थी। साथ ही उनके तीसरे बेटे राजीव की गोली मारकर सीवान शहर में हत्या कर दी गई थी। इस मामले में शहाबुद्दीन को नामजद कराया गा था।







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