जिंदगी में कुछ कर गुजरने की चाह हर किसी की होती है, लेकिन कामयाबी भी ऐसी चीज़ जो आसानी से नहीं मिलती. तरक्की से यह बात साफ हो जाती है कि सफलता के लिए सबसे जरूरी है साहस, धैर्य और कुछ कर गुजरने के लिए निरंतर प्रयास. यह कहानी है एक ऐसे शख्स की जो जॉब के लिए 32 बार रिजेक्ट हो गए थे, अलीबाबा ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन “जैक मा” की सक्सेस की. अभी जैक मा चीन के सबसे दौलतमंद इंसान है. उनकी मौजूदा संपत्ति करीब 23 लाख करोड़ है.

Jack ma
गरीब परिवार में पैदा हुए थे जैक मा
जैक मा का जन्म 15 अक्टूबर 1964 को दक्षिणी चीन के हंगझोउ में हुआ था. जैक मा चीन के एक गरीब परिवार में पैदा हुए थे. वह दो बार कॉलेज के एंट्रेंस एग्जाम में फेल हुए, जिसके कारण वे केएफसी सहित करीब 32 कंपनियों में नौकरी नहीं पा सके. फिर उन्हें तीसरी इंटरनेट कंपनी अलीबाबा से अभूतपूर्व सफलता हासिल हुई. अपने तीन भाई बहन में जैक मा दूसरे थे. जैक मा अपने भाई-बहनों के साथ उस दौर में बड़े हुए थे, जब कम्युनिस्ट चीन पश्चिम से बिल्कुल अलग हो रहा था.
कभी नहीं मानी हार
1972 में अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के हंगझोउ के दौरे के बाद उनका होमटाउन एक टूरिस्ट प्लेस बन गया. उस समय वह टीनएज के दौर में थे तो रोज सुबह पर्यटकों को अंग्रेजी में गाइड करने के लिए शहर के बड़े होटलों में पहुंच जाते थे. उनका निकनेम “जैक” उनके एक टूरिस्ट फ्रेंड ने दिया था.
हाईस्कूल पूरा होने के बाद जैक मा ने आगे की पढ़ाई करने के लिए कॉलेजों में अप्लाई किया. पर वे दो बार एंट्रेंस परीक्षा में फेल हो गए. हार न मानने वाले जैक मा ने जमकर पढ़ाई की और तीसरी बार वे हंगझोई टीचर्स इंस्टीट्यूट के एंट्रेंस में सफल हो गए. 1988 में ग्रैजुएट होने के बाद उन्होंने कई सारी कंपनियों में अप्लाई किया.
पहली बार इंटरनेट पर सर्च किया बीयर
इंग्लिश टीचर की नौकरी पाने से पहले वो केएफसी सहित दर्जनों कंपनियों से रिजेक्ट भी हुए. टीचर की नौकरी से उन्हें 12 डॉलर प्रतिमाह मिलता था. जैक को कम्प्यूटर और इंटरनेट के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, पर 1995 मे अमेरिका में एक दौरे पर वो इससे बड़े प्रभावित हुए. जैक मा ने पहली बार इंटरनेट पर ‘बीयर’ सर्च किया, लेकिन उन्हें सर्च रिजल्ट में कोई भी चीनी बीयर का नाम नहीं मिला.
इसके बाद ही चीन के लिए एक इंटरनेट कंपनी खोलने का फैसला कर लिया. हालांकि, उनके शुरुआती दो वेंचर बुरी तरह से फेल हो गए. लेकिन, इसके 17 साल बाद वो अपने कुछ दोस्तों को एक ऑनलाइन मार्केट प्लेस “अलीबाबा” में इंवेस्ट करने के लिए मनाने में सफल रहे. वर्ष 2005 में याहू ने उनकी कंपनी में 40 फीसदी शेयर खरीदने के लिए करीब 1 अरब डॉलर खर्च किए.







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