लखनऊ- एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर रोक लगा दी थी. यानी कोई भी मुस्लिम अपनी बीवी को तीन बार तलाक बोलकर तलाक नहीं दे सकता है. तीन तलाक पर रोक लगने के बाद एक चौंका देने वाला मामला सामने आया है. एक मुस्लिम महिला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सार्वजनिक तौर पर अपने पति से ‘खुला’ लेकर उससे अलग रहने का ऐलान कर दिया है.

महिला ने मीडिया को बताया की वह दो बार इस्लामी शिक्षण संस्थान नदवा और एक दफा फिरंगी महल भी गई लेकिन उसे वहां से अपने पति से खुला नहीं ले पायी। उसका कहना है की अब सार्वजनिक रूप से अपने पति को खुला का नोटिस भेज रही है. महिला का कहना है की इस नोटिस के बाद अब वह आजाद है.
आइए आपको खुला शब्द का मतलब बताते हैं, अगर सिर्फ बीवी तलाक चाहे तो उसे शौहर से तलाक मांगना होगा , अगर शौहर नेक इंसान होगा तो ज़ाहिर है वो बीवी को समझाने की कोशिश करेगा और फिर उसे एक तलाक दे देगा, लेकिन अगर शौहर मांगने के बावजूद भी तलाक नहीं देता तो बीवी के लिए इस्लाम में यह आसानी रखी गई है कि वो शहर काज़ी के पास जाए और उससे शौहर से तलाक दिलवाने के लिए कहे, इस्लाम ने काज़ी को यह हक़ दे रखा है कि वो उनका रिश्ता ख़त्म करने का ऐलान कर दे, जिससे उनकी तलाक हो जाएगी, इसे ”खुला” कहा जाता है.
इस महिला ने बताया कि वह अपने पति से बहुत ज्यादा परेशान थी. और वह महीने से पति से अलग रह रही थी. बार-बार महिला द्वारा तलाक मांगने के बाद भी उसका पति ना तो उसे तलाक दे रहा था और ना ही खुला। महिला का कहना है की उसके पास सार्वजानिक तौर पर खुला लेने के अलावा उसके पास और कोई रास्ता नहीं था.
‘ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ के वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि खातून ने खुला लेने का जो तरीका अपनाया है, वह सही नहीं है. सिर्फ एक खत के आधार पर खुला नहीं मिलता.
उन्होंने कहा कि खुला की इच्छुक महिला को अपने शौहर को नोटिस देना होता है. अगर पति तीन नोटिस दिए जाने के बावजूद जवाब नहीं देता है तो खुला अपने आप लागू हो जाएगा. मौलाना की इस दलील पर नाइश ने कहा कि अगर उन्हें खातून का कदम गलत लगता है तो अपने दावे को अदालत में साबित करे.
इस बीच, ऑल इण्डिया मुस्लिम विमन पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर ने खातून के कदम को बिल्कुल दुरुस्त करार देते हुए कहा कि जब शौहर और इस्लामी ओहदेदार लोग खुला के लिए मदद नहीं करते तो महिला ‘निकाह फस्ख’ का रास्ता अपना सकती है. ऐसी स्थिति में उसे ना तो काजी की और ना ही तलाक की जरूरत होती है.







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