नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी विपक्षी एकता को बनाने में कमोवेश सफल रहीं। शुक्रवार को उनके द्वारा आयोजित भोज में 17 राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए।

संसद भवन के पुस्तकालय में दिए गये इस दोपहर के भोज की सफलता को लेकर अटकलें चल रही थीं। वैसे एक तरह से यह आयोजन राष्ट्रपति चुनाव के लिए चुनाव के लिए गैर एनडीए को एकजुट करना था। खासकर उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा को मिली भारी सफलता के बाद गैर एनडीए दलों को एकमंच लाने की कवायद शुरू हो गई थी। लेकिन अभी विपक्षी दलों की एकजुटता के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इस मायने में सोनिया गांधी द्वारा दिए गये भोज में 17 गैर एनडीए दलों का शामिल होना मायने रखता है। इस भोज में जिन राजनीतिक दलों के नेताओं ने शिरकत की उनमें प्रमुख रूप से आरजेडी प्रमुख लालू यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, बसपा प्रमुख मयावती, सीपीएम नेता सीता राम यचुरी, सीपीआई के डी. राजा, डीएमके से एम कनिमोई, जनता दल के नेता शरद यादव और केसी त्यागी, नेशनल कांफ्रेस के नेता उमर फारुख शामिल हैं। भोज में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी मौजूद रहे।
मोदी की बढ़ती लोकप्रियता को लेकर विपक्षी दल काफी चिंचित हैं और भाजपा के खिलाफ एकजुट होने की संभावनाओं को तलाश रहे हैं। इसके लिए खासकर उत्तर प्रदेश में बसपा और सपा एक साथ आने के लिए भी अपनी सहमति दे चुके हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव और आगामी गुजरात, हिमाचल, कर्नाटक जैसे विधानसभा चुनाव को लेकर विपक्षी दल एकजुट होकर रास्ता निकालने की कोशिश में लगे हैं ताकि मोदी लहर को रोका जा सके। लेकिन इसके लिए कोई सहमति फिलहाल बनती नजर नहीं आ रही है। आगमी राष्ट्रपति के चुनाव को लेकर विपक्षी दल एक साझा उम्मीदवार खड़ा करने को आतुर हैं। इसके लिए सोनिया गांधी कुछ विपक्षी नेताओं और दलों से बात भी कर चुकी हैं। लेकिन अभी तक विपक्षी दल किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सके हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मौजूदा राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का नाम उनके दोबारा प्रत्याशी बनाये जाने का प्रस्ताव रखा था। इसके अलावा महात्मा गांधी के पौत्र गोपाल कृष्ण गांधी, जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव, लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार और एनसीपी नेता शरद पवार का नाम विपक्षी दलों की ओर से उभरे हैं। इनमें शरद पवार ने इसके लिए अनिच्छा जता चुके हैं। ममता बनर्जी ने सर्वसम्मत प्रत्याशी बनाये जाने की बात कही थी। अब देखना यह है कि आगामी चुनावों के पहले राष्ट्रपति चुनाव के लिए सोनिया की अगुवाई वाली कोशिश क्या रंग दिखाती है।
राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष के आम सहमति वाले उम्मीदवार के रूप में कई नामों पर चर्चा चल रही है, जिनमें पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल एवं महात्मा गांधी के पौत्र गोपालकृष्ण गांधी, जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव, लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार एवं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार शाामिल हैं, हालांकि पवार ने स्वयं को इस दौड़ से अलग रखने की पहले ही घोषणा कर दी थी, और बिहार के मुख्यमंत्री व जेडीयू नेता नीतीश कुमार देश के मौजूदा राष्ट्रपति डॉ प्रणब मुखर्जी को ही दूसरा कार्यकाल दिए जाने का सुझाव दे चुके हैं.
गौरतलब है कि सोनिया गांधी के भोज में शिरकत करने के लिए दिल्ली पहुंचीं ममता बनर्जी ने गुरुवार को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी. वैसे उनके मुताबिक, बैठक ‘सिर्फ बंगाल के विकास पर केंद्रित थी, राजनीति पर नहीं…’, लेकिन उसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए एक ऐसे सर्वसम्मत प्रत्याशी की वकालत की, जिसे लेकर सरकार और विपक्ष दोनों के बीच मतैक्य बनाया जा सके.







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