ज्ञानवापी मस्जिद में वजू खोलने की मांग वाली याचिका हुई दाखिल. 14 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई.

सुप्रीम कोर्ट मुस्लिम पक्ष की ओर से वजू की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है. इस मामले पर 14 अप्रैल को सुनवाई की जाएगी. मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह तारिख तय की. सुप्रीम कोर्ट 14 अप्रैल को वाराणसी के काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी से संबंधित मामले में मुस्लिम पक्ष की नई याचिका पर सुनवाई करने को तैयार हो गया है. इस याचिका में मुस्लिम पक्ष ने कहा था कि उन्हें मस्जिद परिसर के अंदर रमजान के दौरान वजू (धार्मिक कार्य के लिए मुंह-हाथ को धोना) की प्रथा की अनुमति दी जाए. अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.
वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में रमजान के पवित्र महीने के दौरान नमाज अदा करने से पहले वजूखाना को सील किए जाने को लेकर अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. 14 अप्रैल को होगी सुनवाई.

21 अप्रैल को हिंदू पक्ष की याचिका पर होगी सुनवाई
मुस्लिम पक्ष के वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी ने गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इसका जिक्र किया. इसके बाद सीजेआई 14 अप्रैल को मामले को सूचीबद्ध करने पर सहमत हो गए. पीठ ने अहमदी से कहा, “इस संबंध में एक आवेदन दाखिल करें और हम इस पर 14 अप्रैल को विचार करेंगे.”

आपको बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू पक्ष की याचिकाओं पर सुनवाई के लिए भी सहमति जताई है. हिंदू पक्ष की याचिकाओं पर 21 अप्रैल को सुनवाई की जाएगी. हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने कोर्ट को बताया कि ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर वाराणसी की एक अदालत में याचिकाएं दायर की गई थी, जहां बार-बार फैसला टाला जा रहा था. इसके बाद वकील विष्णु जैन की दलील सुनने के बाद सीजेआई ने कहा कि इस मामले पर 21 अप्रैल को सुनवाई करेंगे. मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है.

17 मई को दिया क्षेत्र को संरक्षित करने का आदेश
ज्ञानवापी मस्जिद का वजू क्षेत्र हिंदुओं और मुसलमानों के बीच विवाद का केंद्र है क्योंकि हिंदू पक्षकारों का दावा है कि उस स्थान पर एक शिवलिंग पाया गया है. हालांकि, मुस्लिम पक्षकारों ने इस पर विरोध करते हुए कहा कि यह केवल एक पानी का फव्वारा है. इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा और सुप्रीम कोर्ट ने 17 मई, 2023 को उस क्षेत्र को संरक्षित करने का आदेश दिया गया था.
Aarti Yadav (BJMC II)







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