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न बच्चों की, न अपनी बस बनाएं समझ
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न बच्चों की, न अपनी बस बनाएं समझ

May 9th, 2017 urvashi Goel Articles, Hindi 0 comments

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दसवीं और बारहवीं बोर्ड की परीक्षाएं खत्म हो चुकीं हैं। आगे की पढ़ाई और करियर की राह चुनने की जद्दोजहद बच्चों में ही नहीं, अभिभावकों में भी चल रही होगी। कुछ तो अपना रास्ता चुन चुके होंगे और कुछ अभी कश्मकश में होंगे कि आखिर क्या करना चाहिए। इसमें बच्चों की अपनी रुचि और अभिभावकों के बीच रस्साकशी भी होना स्वाभाविक है। लेकिन काफी कुछ छात्रों के परीक्षा परिणाम पर भी निर्भर करेगा। उसके अंक का कितना प्रतिशत है। यह आगे की पढ़ाई और करियर की राह भी आसान करने वाला होता है। ऐसे छात्र जो पढ़ने में अच्छे हैं और अच्छा परिणाम लाते हैं उनके लिए मनचाहा विषय चुनने और मनचाहा कालेजों में दाखिला पाना मुश्किल नहीं होता। लेकिन जब अंक कम आये तो मुश्किल बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे में छात्र ही नहीं अभिभावक भी रास्ता तलाशने में लग जाते हैं कि किया क्या जाये। कहां पढ़ायें और कौन से विषय का चयन करें जो उनके भविष्य की राह आसान कर सके। यहां बच्चों की रुचि और अभिभावकों के अरमानों के बीच एक जद्दोजहद प्रारंभ हो जाती है।

सच है बच्चों की अपनी रूचि होती है और पैंरेंट्स के अपने अरमान। यहां बच्चों या फिर पैरेंट्स की जीत या हार का सवाल ही नहीं उठता। सवाल होता है बच्चे के कुछ कर गुजरने का। फिर बारी आती है करियर के विभिन्न मोड़ पर उसके स्किल की। अकसर करियर की राह चुनने में एक कश्मकश देखा जाता है। बच्चा इंजीनियर बनना चाहता है तो यह जद्दोजहद प्रारंभ हो जाती है कि कौन सी स्ट्रीम प्रिफर की जाए। सवाल उठने लगते कि आईटी में भीड़ बढ़ती जा रही है। तरह-तरह के सवाल और राय मश्विरे के दौर शुरू हो जाते हैं। लेकिन यह कम लोग ही कहते और समझते हैं कि फिट वही होगा जो सर्वोत्तम होगा। वरना लोगों के लाखों के सैलरी पैकेज देख और सुन कर बस अचंभित हुआ जा सकता है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि करियर का क्षेत्र समय के साथ जरूरतों से जुड़ा होता है। इसे इस तरह से समझा जा सकता है कि एक समय मेडिकल फील्ड में अधिक चर्चा होती थी तो बस डाक्टर, फार्मेसिस्ट, नर्स की। लेकिन स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती हमारी सतर्कता ने हेल्थ केयर इंडस्ट्री को पंख लगा दिए हैं। जीवनशैली में बदलाव के कारण भी इस इंडस्ट्री में काफी वृद्धि हुई है। अस्पताल, मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, मेडिकल डिवाइस, आउटसोर्सिंग. टेलीमेडिसीन हेल्थ इंश्योरेंस और मेडिकल इक्यूपमेंट इसमें शामिल हैं। आईटी मार्केट के इस सेक्टर के साथ जु़ड़ जाने से जॉब के मामले अब सीधे हेल्थ से जुड़े नहीं रह गये हैं। विदेशी प्रत्यक्ष निवेश ने इस सेक्टर को और बल प्रदान कर दिया है। इंजीनियरिंग करने वाले छात्रों के बीच आईटी सेक्टर का क्रेज काफी है और आज यह भी हॉट फील्ड होने के साथ संभावनाओं से भरा है। लेकिन आईटी के सर्विस सेक्टर के बारे में अधिक जागरूकता कहां है। 4 जी और फिर 5 जी के साथ स्मार्ट फोन, वीडियो कांफ्रेंसिंग का बढ़ता प्रयोग टेलीकॉम सेक्टर के साथ आईटी के लिए काफी सुखद है।

चाहे किसी परीक्षा के बाद अगले क्लास के लिए विषय चयन का सवाल हो या फिर करियर का चयन हमारी उम्मीदों को पंख लगाने के साथ हमारे पूरे जीवन से जुड़ा होता है। इसलिए इसके चयन का फैसला करने में सावधानी बरतना आवश्यक होता है। यह सही है कि ज्यादातर पैरेंट्स की तमन्ना उन परंपरागत विषयों और करियर की राह पर जाती है जो उनके दिलो दिमाग से पहले से मौजूद होती हैं। इनमें ज्यादातर की तमन्ना अपने बच्चे को इंजीनियर, डाक्टर या फिर आईएएस बनाने की होती है। लेकिन बच्चों की रुचि अब उन गैरपरंपरागत और उन आधुनिकतम स्ट्रीम की ओर बढ़ चुकी है जो उन्हें न केवल रास आती है बल्कि उन्हें संभावनायें भी अधिक दिखाई देती है। एनीमेशन, ग्राफिक डिजाइनिंग, फैशन, फर्नीचर डिजाइनिंग, कोरियोग्राफी, न्यूट्रीशियन, वाइल्ड लाइफ, मीडिया और पब्लिक रिलेशन, ब्रांड कंसल्टेंसी, वेब डेवलपर आदि ऐसे करियर विकल्प हैं जिसके बारे में कहा जा सकता है कि इस संबंध में अधिक जानकारी का अभाव है। ये सूची काफी लंबी है। लेकिन आज के बच्चों की रुचि को समझते हुए जानकारी हासिल करके उनके अरमानों को पंख लगाया जा सकता है।

यहां यह जानना जरूरी है कि देश की करीब आधी आबादी 25 साल से कम उम्र की है। इनमें से 12 करोड़ लोगों की उम्र 18 से 23 साल के बीच की है। देश में संसाधनों की कमी नहीं है। कमी है तो बस उन संसाधनों को उपयोग करने की और उन्हें मूर्त रूप देने की। चंद लोगों की लाखों की सैलरी पैकेज हमारा उत्साह बढ़ा सकते हैं। बढ़ना भी चाहिए लेकिन उसके लिए जिस ज्ञान और कौशल की जरूरत होती है उस पर भी गौर करना हमें नहीं भूलना चाहिए। समय बदल चुका है और उसकी गति और बयार को समझा जाना चाहिए। यह बच्चों को ही नहीं अभिभावकों को भी समझना चाहिए। वही विषय और करियर की राह को चुनना चाहिए जो बच्चों को रास आती हो और उनकी रुचि का हो, जिससे वे उसमें अपना बेहतर दे सकें। अभिभावकों की यह जिम्मेदारी होती है कि वे अपने बच्चों के भविष्य के प्रति सजग रहकर उनके मददगार बनें। न कि अपनी समझ को थोपने की कोशिश करें और न ही अपने बच्चों की मनमानी के आगे झुकें। एक समझ विकसित करें जो उनके बच्चों के अरमानों को पूरा करने में सहायक हो सके।

विजय प्रकाश

(लेखक करियर एक्सपर्ट हैं)

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