Abhishek Kumar
बिहार में पटना से 70 किलोमीटर की दूरी नालंदा के 1 जिले दिरुपुर में एक अजीब दृश्य देखने को मिला है जिसमें एक बुजुर्ग महिला (कौशल्या देवी) अपने 8 साल की पोती के साथ शौचालय में जीवन बिताने को मजबूर है| गांव के लोगों का कहना है कि उस महिला के बेटे और बहू अब जीवित नहीं है| इस बुजुर्ग महिला का गांव में एक मिट्टी का घर भी था जो कुछ साल पहले तूफान की वजह से टूट गया | इसके बाद से ही बुजुर्ग महिला अपनी 8 साल की पोती के साथ शौचालय में अपने जीवन व्यतीत कर रही है|
सवाल यह उठता है कि इतना सब कुछ होते हुए भी बिहार की सरकार को इसकी जरा भी भनक नहीं है अगर सरकार की बात करें तो ऐसे बहुत से आवास योजना चलाती है या नई योजना बनाती है | अगर हम नालंदा जिला की बात करें तो यह बिहार सरकार (नीतीश कुमार) का गृह जिला है | अगर नीतीश कुमार अपने गृह जिले की सही ढंग से देखभाल नहीं कर पा रहे हैं तो पूरा बिहार कैसे संभालेगा ? क्योंकि जो काम उनके जिले में अभी तक सही ढंग से पूरा नहीं हो पाया है तो फिर पूरे बिहार की बात ही अलग है |

वहीं हम अगर पटना में स्थित गंगा रिसर्च सेंटर की बात करें तो यह वही गंगा रिसर्च सेंटर है जिसे 2017 में नमामि गंगे प्रोजेक्ट के द्वारा करोड़ों रुपए खर्च करके बनवाया गया था जिसके उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पटना गए थे इसका मुख्य उद्देश्य गंगा के गंदे पानी को साफ करने के लिए रिसर्च करना था यह मुद्दा यहां इसलिए उठाया गया है जिस काम के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए गए | यह गंगा रिसर्च सेंटर 2 साल से धूल खाता नजर आ रहा है इसमें 2 साल से अभी तक कोई भी रिसर्च शुरू नहीं हुआ बल्कि इसमें अब लोग द्वारा शराब और जुए खेलें जाने लगे हैं |







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