06 July 2020, Kaushlendra raj Shukla
बीते सप्ताह उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में आकाशीय बिजली गिरने से सैकड़ों लोगों की मौत हुई। मानसून के आरंभिक दौर में आकाशीय बिजली का प्रकोप पिछले कई दिनों से जारी है। दरअसल आकाशीय बिजली एक प्राकृतिक आपदा है जिससे बहुत नुकसान होता है। आकाशीय बिजली गिरने यानी वज्रपात के समय आसमान में विपरीत ऊर्जा के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं और विपरीत दिशा में जाते हुए टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है। आसमान में किसी तरह का कंडक्टर न होने से यह बिजली कंडक्टर के लिए धरती पर पहुंचती है। जब यह आकाशीय बिजली लोहे के खंभों, पेड़ आदि के आसपास से गुजरती है तो वह कंडक्टर का काम करता है। और उस समय यदि कोई व्यक्ति या पशु उसके संपर्क में आता है तो उसकी जान जा सकती है।
आकाशीय बिजली से मारे जाने वालों में सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों के लोग और मवेशी होते हैं। यह भी ध्यान देने की बात है कि आकाशीय बिजली गिरने की घटना गृह मंत्रालय की आपदाओं की अधिसूची में शामिल नहीं है। वज्रपात से होने वाली मौतों की तादाद लगभग 10 फीसद है। हर साल आसमानी बिजली की चपेट में आने से करीब तीन से साढ़े तीन हजार लोगों की मौत हो जाती है। दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले भारत में खेतों या खुले में काम करने वाले लोगों की तादाद बहुत ज्यादा है। इससे यहां आसमानी बिजली की चपेट में आने वालों की तादाद बढ़ जाती है। आंकड़ों के अनुसार देश में वर्ष 1967 से 2016 तक प्राकृतिक आपदाओं में कुल जितने लोगों की मौतें हुई हैं, उनमें 39 फीसद वज्राघात से हुई है। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014 में 2,582 लोग बिजली गिरने से मारे गये थे, जबकि 2013 में 2,833 लोग इसके शिकार हुए थे।
क्या करें क्या न करें, इसे जानें
बिजली के खंभों और टॉवरों से दूरी बरतें। वज्रपात की आशंका हो तो खुली जमीन पर न लेटें। वाहनों से निकल कर तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाएं। उसी छतरी का इस्तेमाल करें, जिसमें धातु की बजाय लकड़ी का हैंडल लगा हो। खुले आसमान के नीचे अकेले फंस गये हों तो गड्ढों या नीची चट्टानों की ओट लें। विस्तृत मैदान में, जहां कोई पेड़ या ऊंची रचना न हो, वहां खड़े रहने की गलती न करें।
बहरहाल हर साल राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन लोगों को इससे बचने के उपाय बताकर जागरूक करता है। अगर आसमान में बिजली कड़क रही है और आप घर के बाहर हैं तो सबसे पहले सुरक्षित जगह तक पहुंचने का प्रयास करें। तुरंत पानी, बिजली के तारों, खंभों, हरे पेड़ों और मोबाइल टावर आदि से दूर हट जाएं। खुले आसमान में हैं तो अपने हाथों को कानों पर रख लें, ताकि बिजली की तेज आवाज से कान के पर्दे न फट जाएं। अपनी दोनों एडियों को जोड़कर जमीन पर पर उकड़ू बैठ जाएं। इस प्रकार काफी हद तक आकाशीय बिजली से बचाव हो सकता है।







Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.