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भारत और चीन के बीच आज हो सकता है शांति समझौता!..
भारत और चीन के बीच आज हो सकता है शांति समझौता!..
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भारत और चीन के बीच आज हो सकता है शांति समझौता!..

June 23rd, 2020 Upendra Kumar Paswan Articles, Breaking News, Hindi, News, दुनिया, देश, राजनीति 0 comments

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उपेंद्र कुमार पासवान
23 june 2020

भारत और चीन के बीच में लद्दाख में जारी गतिरोध को लेकर शांति और समझौते की राह आज निकल सकती है। भारत-रुस और चीन तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की वर्चुअल बैठक होनी है। इसमें भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर, चीन के विदेश मंत्री वांग यी और रूस के लिदेश मंत्री सर्गेई लावरोव आपसी सहयोग, समन्वय तथा भावी रणनीतियों पर चर्चा करेंगे।
सर्गेई लावरोव भारत और चीन के बीच में हमेशा तनाव कम करने के पक्षधर रहे हैं। राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के बाद रूस के नेताओं में अच्छा प्रभाव रखते हैं। वहीं देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह विजय दिवस परेड में शिरकत के लिए मास्को में हैं।
चीन की पहल पर सैन्य कमांडरों की बैठक रही बेनतीजा
सोमवार को लद्दाख में भारतीय सेना की 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और चीन के मेजर जनरल लियो लिन के बीच करीब 11 घंटे तक चर्चा चली। बताते हैं संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया) नवीन श्रीवास्तव और चीन के उनके समकक्ष के बीच बनी सहमति के आधार पर दोनों देश के सैन्य अधिकारी बैठे थे।
सोमवार की बैठक में दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पर अड़े रहे। हालांकि सौन्य सूत्र बताते हैं बातचीत का रुख ठीक और आशावान था। सैन्य कमांडरों की बैठक आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। भारत ने चीनी पक्ष को साफ बताया है कि 15 जून की घटना के बाद उसने अपने प्रोटोकॉल में बदलाव किया है।
वास्तविक नियंत्रण रेखा के इलाके में गश्त के दौरान भारतीय सुरक्षा बलों के लिए स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर में बदलाव किया गया है। अब हमारे सैनिक हथियारों के साथ गश्त करेंगे।

इतना ही नहीं 15 जून के तरह की या पांच मई को लद्दाख में हुई झड़प जैसी कोई घटना की पुनरावृत्ति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भारतीय सुरक्षा बल इसका माकूल जवाब देंगे।
सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवाणे लेह में
सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवाणे ने सोमवार को सेना के टॉप कमांडरों के साथ बैठक की थी। वह लेह में 14वीं कोर के सैन्य कमांडर समेत स्थानीय कमांडरों के साथ बैठक करेंगे और अब तक हुई सैन्य कमांडरों की बातचीत की समीक्षा करेंगे।

सेनाध्यक्ष लेह-लद्दाख में सैन्य तैयारियों, वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास की स्थिति की भी समीक्षा करेंगे। सेनाध्यक्ष का यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है। पिछले सप्ताह वायुसेनाध्यक्ष एयरचीफ मार्शल भी क्षेत्र के दौरे पर थे।

उन्हें लेह में काफी समय बिताया था। इसके बाद श्रीनगर चले गए थे। माना जा रहा है कि चीन  के साथ शांति की कोशिशों के बीच भारत लगातार चीन की चुनौतियों का आकलन करके मोर्चाबंदी तेज कर रहा है।

सेनाध्यक्ष का दौरा भी इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे लेह-लद्दाख में तैनात सैन्य बलों का मनोबल भी बढ़ेगा।
वार्ता या टकराव चीन को तय करना है
भारत का साफ मानना है कि रिश्तों की तासीर पड़ोसी देश चीन को ही तय करनी है। विदेश मंत्रालय सूत्रों के अनुसार 6 जून की सैन्य कमांडरों की वार्ता से दोनों देशों में सब कुछ पटरी पर आने की उम्मीद दिखाई पड़ रही थी, लेकिन 15 जून को पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 पर गलवां घाटी में जो हिंसक झड़प हुई, उसने सब पर पानी फेर दिया।

भारत का स्पष्ट तौर पर मानना है कि ऐसा चीन के सैनिकों की एकतरफा कार्रवाई तथा वास्तविक नियंत्रण रेखा में सुनियोजित बदलाव के प्रयास के कारण हुआ। भारत का कहना है कि वह चीन या अपने किसी भी पड़ोसी देश से टकराव नहीं चहता, लेकिन एकतरफा कार्रवाई सहन के बाहर है।

राजनयिक गलियारे के सूत्रों का कहना है कि एशिया में भारत और चीन दो मजबूत खंबे हैं। दोनों के बीच में सीमा विवाद से अलग तमाम बड़े अंतरराष्ट्रीय हित हैं, लेकिन सीमा पर टकराव के मुद्दे इन हितों पर विपरीत असर डालते हैं।

इसलिए यह चीन को तय करना है कि उसे अपने पड़ोसी देश के साथ कैसा व्यवहार रखना है। चीन ने एक तरफा कार्रवाई से शांति प्रयासों के माहौल को बिगाड़ा है। अब उसे ही माहौल बनाने की पहल करनी होगी।

बताते हैं स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और शिखर राजनीतिक नेतृत्व प्रधानमंत्री मोदीइस मुद्दे पर अभी पहल करने से संकोच कर रहे हैं।
क्या चाहता है भारत
चीन के सुरक्षाबल बिना किसी शर्त के लद्दाख क्षेत्र में अप्रैल 2020 की स्थितियों में लौट जाएं। पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 वास्तविक नियंत्रण रेखा के इधर भारतीय क्षेत्र का भू-भाग है। यहीं 15 जून को हिंसक झड़प हुई थी।

गलवां नदी घाटी के इस क्षेत्र को पूरी तरह से खाली कर दें। पैगोंग त्सो के पास 8 किमी तक की लंबाई वाले इलाके में चीनी सैनिकों ने स्थाई सैन्य संरचना और बंकर तक बना लिए हैं। यह क्षेत्र भी भारत का है। फिंगर 4 से 8 तक भारतीय सुरक्षा बल गश्त करते हैं।

फिंगर 3 और 4 के बीच में भारत तिब्बत सीमा पुलिस की निगरानी चौकी है। इसलिए चीन बिना वजह विवाद को तूल न दे और इस क्षेत्र में भारतीय सुरक्षा बलों की बिना रुकावट गश्त होने दे।
भारत का मानना है कि मई 2020 से जून 2020 तक दोनों देशों के सैनिकों में जिस तरह की हिंसक झड़प हुई है, इसे भविष्य में रोकने के लिए सीमा सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली को और ठोस आकार दिया जाए।

ताकि इसकी पुनरावृत्ति न होने पाए। इस तरह से आपसी रिश्ते एक दूसरे के सम्मान, बराबरी और पारदर्शिता पर आधारित हों। भारत का स्पष्ट कहना है कि वह चीन के साथ तय शर्तों में किसी तरह का उल्लंघन नहीं करता।

वास्तविक नियंत्रण रेखा का पूरा आदर करता है और चीन से भी इसकी अपेक्षा करता है।

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