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MSME के अंतर्गत छोटे उद्योगों को 3 भागों में बांटा गया है – सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग…
MSME के अंतर्गत छोटे उद्योगों को 3 भागों में बांटा गया है – सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग…
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MSME के अंतर्गत छोटे उद्योगों को 3 भागों में बांटा गया है – सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग…

June 5th, 2020 Shivani Rajwaria Articles, Hindi, Lifestyle, News, कारोबार, देश, राजनीति 0 comments

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05 June 2020,Shivani Rajwaria

जो व्यक्ति उद्योग दुनिया से तालुक रखते हैं या उसमें आना चाहते हैं उनके लिए यह जानना ज़रूरी हो जाता हैं कि एमएसएमई में सरकार क्या काम कर रहीं है। हाली में एमएसएमई का काफ़ी ज़िक्र हो रहा है इसके अधिनियमों में भी बदलाव किए गए है जिसके चलते उद्योग जगत से जुड़ना आसान लगने लगा हैं।

सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि एमएसएमई क्या है.इसके तहत सभी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग आते हैं जिनका उद्योग क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण योगदान होता है यह एक स्कीम है जिसके अंतर्गत छोटे उद्योगों को 3 भागों में बांटा गया है – सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग. MSME रजिस्ट्रेशन के माध्यम से छोटी कंपनियां सरकार की योजनाओं का लाभ उठा सकती हैं.सरकारी की स्कीम्स ऐसी हैं, जिनका लाभ आप बिना MSME का रजिस्ट्रेशन के नहीं ले सकते हैं।सरकार द्वारा देश की अर्थव्यवस्था को व्यवस्थित करने में यह महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं जिसके चलते सरकार ने इनके योगदान को देखते हुए एमएसएमई अधिनियम में कुछ फेरबदल किए हैं। जिससे निम्न स्तर पर होने वाले उद्योगों को काफी लाभ मिलेगा।
एमएसएमई को केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों ही अपने स्तर पर मदद प्रदान करती हैं।बात करेंगे 2006 के अधिनियम से जिसमें एमएसएमई के लिए परिभाषा निर्धारित किया गया था।
इस अधिनियम के अनुसार उद्योगों के कई प्रकार निर्धारित किए गए हैं-
मैन्युफैक्चरिंग एंटरप्राइजेज:- इसके अंतर्गत नई चीजों के निर्माण का कार्य किया जाता हैं।
सर्विस एंटरप्राइजेज:- सर्विस सेक्टर मुख्य रूप से लोगों और विभिन्न संस्थानों को सेवा यानी सर्विस देने का काम होता है।

आईए इसे आकार यानी साइज़ के माध्यम से भी समझते है –
सूक्ष्म उद्योग के लिए परिभाषा
जिन उद्योगों में 25 लाख़ तक की मशीनरी लगी होती हैं वो उद्योग सूक्ष्म उद्योग के अंदर आते हैं जोकि केवल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए लागू है वहीं अगर सर्विस सेक्टर(उद्योग)की बात करें तो 10 लाख़ तक का निवेश मशीनरी या सेटअप के लिए होना अनिवार्य है तभी सूक्ष्म उद्योग को सर्विस सूक्ष्म उद्योग के अंदर माना जाएगा।

लघु उद्योग के लिए परिभाषा
मैन्युफैक्चरिंग में लघु उद्योग के लिए 25 लाख़ से 5 करोड़ तक की मशीनरी खरीद होना अनिवार्य बताया गया है वही सर्विस सेक्टर में लघु उद्योग के लिए 10 लाख से 2 करोड़ के बीच मशीनरी और अन्य चीजों की खरीद निर्धारित की गई हैं।

मध्यम उद्योग के लिए परिभाषा
मैन्युफैक्चरिंग उद्योग में मध्यम उद्योग वो उद्योग आते हैं जिनमें 5 करोड़ से 10 करोड़ के बीच मशीनरी और अन्य चीजों पर निवेश किया गया हो और सर्विस सेक्टर में मध्यम उद्योग के लिए 5 करोड़ तक की मशीनरी व अन्य चीजों पर खरीद की बात की गई है।

वर्ष 2006 के अधिनियम की परिभाषा के अनुसार इन शर्तों को पूरा करने के उपरांत ही आप उद्योग जगत में काम कर सकते थे लेकिन अब इस अधिनियम में सरकार द्वारा संशोधन किया गया है जिसके तहत उद्योगों को आकार के आधार पर पहचान नहीं दी जाएगी बल्कि वार्षिक टर्न ओवर के बेसिस पर उनको देखा जाएगा जिसमें निम्न बिंदु शामिल है-

सूक्ष्म उद्योग: जो उद्योग 5 करोड़ सालाना टर्न ओवर तय करते है सूक्ष्म उद्योग श्रेणी में आएंगे।
लघु उद्योग:लघु उद्योग के लिए 5 करोड़ से 75 करोड़ तक का सालाना टर्नओवर निर्धारित किया गया है।
मध्यम उद्योग: वहीं मध्यम उद्योग के लिए 75 करोड़ से 250 करोड़ का सालाना टर्नओवर वाले उद्योग मध्यम उद्योग की श्रेणी में आएंगे।

महत्वपूर्ण बिंदु…
MSME में उद्योग को शुरू करने के लिए MSME का रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है तभी आप सरकार द्वारा उपलब्ध सभी सुविधाओं का लाभ उठा पाएंगे।

रजिस्ट्रेशन के लिए अधिकारिक वेबसाइट पर जाना होता है अपने कारोबार की श्रेणी को चुनकर आप फॉर्म को फिल करते हैं जरूरी कागजात की पीडीएफ फाइल अपलोड करने के बाद ही अब फॉर्म ज़मा कर पाएंगे इसके अलावा आप किसी रजिस्टर्ड चार्टर्ड अकाउंटेंट या पंजीकृत वकील द्वारा भी अपना पंजीकरण करवा सकते हैं।

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