शबाना बानो,15/05/2020.
रमजान को नेकियों का मौसम भी कहा जाता है। इस महीने में मुसलमान अल्लाह की इबादत ज्यादा करता है। यह महीना समाज के गरीब और जरूरतमंद बंदों के साथ हमदर्दी का है। इस महीने में रोजे़दारों को इफ्तार कराने वाले के गुनाह माफ हो जाते हैं।

अल्लाह की राह में खर्च करना अफज़ल है। ग़रीब चाहे वह अन्य धर्म के क्यों न हो, उनकी मदद करने की शिक्षा दी गयी है। दूसरों के काम आना भी एक इबादत समझी जाती है। ज़कात, सदक़ा, फित्रा, खैर खैरात, ग़रीबों की मदद, दोस्त अहबाब में जो ज़रुरतमंद हैं उनकी मदद करना ज़रूरी समझा और माना जाता है। अपनी ज़रूरीयात को कम करना और दूसरों की ज़रूरीयात को पूरा करना अपने गुनाहों को कम और नेकियों को ज़्यादा कर देता है।
फ़ारसी भाषा में उपवास को रोज़ा कहते हैं। उपवास के दिन सूर्योदय से पहले कुछ खा लेते हैं जिसे सहरी कहते हैं।
दिन भर न कुछ खाते हैं न पीते हैं। शाम को सूर्यास्त के बाद रोज़ा खोल कर खाते हैं जिसे इफ़्तारी कहते हैं।
यह महीना इबादत वाला महीना होता है।
Shabana Anwar
Bjmc- ii







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