दिव्यांश यादव,14 अप्रैल 2020

कोरोना काल के बीच समझ नहीं आ रहा उन नक्सलियों का क्या हुआ जिन्होंने कुछ ही दिन पहले 17 जवानों को शहीद कर दिया था, प्रशासन शायद कोरोना को ख़तम करने में इतना व्यस्त है कि उसे इसपर ध्यान ही नहीं जा रहा, आख़िर कब हम इन घरों के अंदर बैठे दुश्मनों का अंत कर पाएंगे लेकिन इसके लिए हमें नक्सलवाद को समझना होगा ?
नक्सलवाद अधैर्य की वो उपज है, जिसकी बस्ती में मानवता का मतलब मौत है,नक्सलवाद वह फसल है जिसकी जड़ों में खून रिसता है,नक्सलवाद का जन्म सिस्टम की खामियों को दूर करने के लिए हुआ था पर यह राजनीति की भेंट चढ़ गया !
नक्सलवाद की शुरुआत (Cause of Naxalism in India):
एक वक्त था यह समाज ऊंच-नीच भेद-भाव से भरा पड़ा था, किसानों की दुर्दशा चरम पर थी सन 1967 में हर जगह उपेक्षा से परेशान पश्चिम बंगाल West Bengal के नक्सलबाड़ी Naxalbari गांव के किसानों ने इस दुर्दशा का जिम्मेदार सरकार की गलत नीतियों को समझा, धीरे-धीरे यह विद्रोह हिंसक होता गया जो आज तक देश को खोखला करता आ रहा है !
नक्सलवाद के जनक (Father of the Naxal Movement):
चीन में हुए कम्युनिस्ट आंदोलन से प्रेरणा पाकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता चारु मजुमदार Charu Mazumdar और कानू सान्याल Kanu Sanyal ने 1967 में सत्ता खिलाफ एक सशस्त्र आंदोलन की शुरुआत की।
उनका मानना था कि भारतीय मजदूरों और किसानों की दुर्दशा के लिए सरकारी नीतियां ही जिम्मेदार हैं, जिसकी वजह से उच्च वर्गों का शासन तंत्र पर वर्चस्व स्थापित हो गया है और इसे केवल बंदूक के दम पर ही समाप्त किया जा सकता है ।







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