19 नवंबर 2019,शिवानी पाल
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो को शायद आपने भी देखा हो यह वीडियो पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हो रहा है । वीडियो को देखने के बाद लोगों के गुस्से से भरे कमेंट भी आ रहे हैं । शायद ही कोई ऐसा होगा जो इस वीडियो को देखने के बाद गुस्से से लाल ना हो । सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह वीडियो आपके रोंगटे खड़े कर देगा आखिर कोई इंसान दूसरे इंसान के साथ इतनी बेरहमी के साथ कैसे पेश आ सकता है। यह सरासर इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली तस्वीर है। इस वीडियो में एक छोटी सी बच्ची को एक महिला जानवरों की तरह पीट रही है। महिला का बच्ची से क्या रिश्ता है यह अभी साफ नहीं हो पाया है लेकिन जिस हैवानियत से वह बच्ची पर बरस रही है उसे देखकर अच्छे अच्छों की रूह कांप उठेगी । यह वीडियो किसी घर के बाहर का है जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है की वीडियो में बच्ची को पीटने वाली महिला से उसका काफी गहरा रिश्ता है । पीला सूट पहने ये महिला धीरे-धीरे बच्चे की ओर आती है और उसे झटके से अपने दोनों हाथों से पकड़कर उसका गला पकड़ लेती है । पागल सांड की तरह उस पर झपट पड़ती है उसके बालों को खींचते हुए जमीन पर पटक देती है उसकी चोटी को पकड़कर उसकी पीठ पर बेशुमार तेज तेज थप्पड़ बजाती है। इस दौरान बच्ची की चीखें आपके कानों को चीरती हुई निकल जाएंगी । बच्ची रोते-रोते गुहार लगा रही है पापा बचाओ, पापा बचाओ, पापा बचाओ.. उसकी मदद के लिए कोई नहीं आ रहा। मकान के पीछे कुछ लोग खड़े हैं जो अपना काम करते हुए यह सब देख रहे हैं लेकिन कोई उसकी मदद के लिए नहीं आ रहा। महिला उसे जमीन पर पटक पटक कर पीती जा रही है एक सेकेंड के लिए भी उसकी हाथों को राहत नहीं मिल रही । मानो जैसे छोटी सी बच्ची ने ऐसा कौन सा गुनाह कर दिया जिसके लिए महिला उस नन्ही सी बच्ची को इतना प्रताड़ित कर रही हैं। इतना ही नहीं मारते मारते उसके गले को दबाती हुई ।महिला उसे चुप होने के लिए धमका रही है बच्ची की गिड़गिड़ाहट आपका भी कलेजा बाहर निकाल कर रख देगी । इतने से भी इस महिला का दिल नहीं भरता तो वह उसके गालों पर अनगिनत थप्पड़ थप्पड़ ,थप्पड़ पर थप्पड़ बजाती चली जाती है और थप्पड़ भी इतना तेज जिसकी गूंज आप खुद महसूस कर सकते हैं उसके दिल को फिर भी सुकून नहीं पहुंचता वह पास में पड़ी चप्पल को उठाती है और अब उस चप्पल से उसको पीटना शुरू कर देती है बच्ची रोते रोते चिल्लाती रहती है मुझे छोड़ दो ,मुझे छोड़ दो, पापा बचा लो, पापा बचा लो….. लेकिन कोई उसकी आवाज सुनकर बाहर नहीं आता ऐसा क्या किया यह कहना मुश्किल है लेकिन एक पांच से सात साल की बच्ची ऐसा कौनसा अपराध कर सकती हैं जिसके लिए उसे इतनी बुरी तरह मारा जाए ।
हमारे देश में बच्चों के शोषण को लेकर आए दिन कोई ना कोई खबर आती रहती है और अब तो सोशल मीडिया एक ऐसा प्लेटफार्म बन चुका है इसके द्वारा अपराधी आसानी से दुनिया के सामने पेश हो जाता है और उसकी करतूत पूरा समाज देख पाता है और उसे उसके अपराध की सजा भी मिलती है।
अकसर बच्चों को बेरहमी से पीटने की खबरेंआती रहती हैं, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल होते रहते हैं. स्कूलों के साथ-साथ घर पर भी कई बार परिजन बच्चों को गुस्से में बुरी तरह पीटते हैं, जिससे वो अस्पताल तक पहुंच जाते हैं. शिक्षा के अधिकार के तहत टीचर बच्चे को डरा-धमका या पीट नहीं सकते, ऐसा करने पर उनके खिलाफ केस दर्ज हो सकता है और उनकी नौकरी भी जा सकती है. वहीं इसके साथ-साथ अगर बच्चे के माता-पिता उसे पीटते हैं तो उनके खिलाफ भी केस दर्ज हो सकता है. आइए आपको बताते हैं कि बच्चों को पीटने के क्या-क्या साइडइफेक्ट हो सकते हैं.
जूवनाइल जस्टिल एक्ट
3 साल पहले मध्य प्रदेश के शाजापुर में एक रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया था. जहां एक सौतेले पिता ने अपने 3 साल के मासूम बेटे को उलटा लटकाकर डेढ़ घंटे तक बेल्ट और चप्पलों से पीटा था. मासूम का कसूर सिर्फ इतना था की वो 10 तक गिनती नहीं बोल सका. आपको बता दें अगर पेरेंट्स बच्चे को पीटते हैं तो उनके खिलाफ जेजे (जूवनाइल जस्टिस) एक्ट के तहत पुलिस से शिकायत की जा सकती है. बच्चे को चोट पहुंचती है तो आईपीसी के तहत भी केस दर्ज हो सकता है. जेजे ऐक्ट के तहत दोषी पाए जाने पर 6 महीने तक की सजा ही सकती है.
3 साल पहले मध्य प्रदेश के शाजापुर में एक रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया था. जहां एक सौतेले पिता ने अपने 3 साल के मासूम बेटे को उलटा लटकाकर डेढ़ घंटे तक बेल्ट और चप्पलों से पीटा था. मासूम का कसूर सिर्फ इतना था की वो 10 तक गिनती नहीं बोल सका. आपको बता दें अगर पेरेंट्स बच्चे को पीटते हैं तो उनके खिलाफ जेजे (जूवनाइल जस्टिस) एक्ट के तहत पुलिस से शिकायत की जा सकती है. बच्चे को चोट पहुंचती है तो आईपीसी के तहत भी केस दर्ज हो सकता है. जेजे ऐक्ट के तहत दोषी पाए जाने पर 6 महीने तक की सजा हों सकती है।
पैरेंट्स अगर बच्चे को पीटते हैं और उसे चोट लगती है तो उनके खिलाफ धारा 323 के तहत केस दर्ज हो सकता है. इसमें आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होगी और बच्चे को कोर्ट में खुद ही अपना केस लड़ना होगा और जुर्म साबित होने पर परिजनों को जुर्माना या एक साल की कैद हो सकती है. लेकिन बच्चे को नुकीले हथियार से मारने पर धारा 324 लगती है, जिसमें 3 साल तक की सजा का प्रावधान है. जानलेवा चोट पहुंचाने पर 326 के तहत मुकदमा दर्ज होगा, जिसमें 10 साल तक या उम्रकैद तक सजा हो सकती है. मारपीट के दौरान अगर बच्चे के सिर पर चोट लगी तो धारा 308 के तहत गैर-इरादतन हत्या की कोशिश का का केस बनेगा, जिसके तहत 3 से 7 साल तक कैद हो सकती है.







Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.