हर साल 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस मनाया जाता हैं। हर साल मानव विकास और समाज के लिए उनके अधिकारों को जानने और साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए इसे मनाया जाता है। किसी भी देश काल परिस्थिति में शिक्षा ही वह ऐसी अलक है जिसके माध्यम से समाज देश को जागरूक करके उसे ऊंचाइयों पर ले जाकर विकसित किया जा सकता है।
यूनेस्को ने 7 नवंबर 1965 को ये फैसला लिया कि अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस हर साल 8 सितंबर को मनाया जाएगा जोकि पहली बार 1966 से मनाना शुरु हुआ। व्यक्ति, समाज और समुदाय के लिए साक्षरता के बड़े महत्व को ध्यान दिलाने के लिए पूरे विश्व भर में इसे मनाना शुरु किया गया।
हर साल संयुक्त राष्ट्र विश्व साक्षरता दिवस को एक थीम के तौर पर मानता है। इस साल वैश्विक कोविड-19 महामारी के खतरे के अनुरूप यह ‘साक्षरता शिक्षण और कोविद -19: संकट और उसके बाद’ पर केंद्रित है। इस साल इस मौके पर ‘शिक्षकों की भूमिका और बदली शिक्षा पद्धति’ पर जोर दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों पर आधारित एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में साक्षरता दर 77.7 फीसदी है। अगर देश के ग्रामीण इलाकों की बात करें तो वहां साक्षरता दर 73.5 फीसदी है जबकि शहरी इलाकों में यह आंकड़ा 87.7 फीसदी है। साक्षरता के मामले में देश का शीर्ष राज्य केरल है, जहां 96.2 फीसदी लोग साक्षर हैं। वहीं आंध्र प्रदेश इस मामले में सबसे निचले पायदान पर है। वहां की साक्षरता दर महज 66.4 फीसदी ही है।

आजादी के बाद से देश में साक्षरता दर में 57 फीसदी की वृद्धि हुई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटिश शासन के दौरान देश में सिर्फ 12 फीसदी लोग ही साक्षर थे।
भारत को आज़ाद हुए 74 साल हो गए हैं, अगर हम आजादी से वर्तमान साक्षरता दर का आंकलन करें तो स्थिति थोड़ी बेहतर नजर आती है, लेकिन ईसके बाबजूद भी भारत बाकी देशों से पीछे हैं। रिपोर्ट में मिली जानकारी से पता चलता है कि भारत की साक्षरता दर विश्व की साक्षरता दर से 84 फीसदी कम है। देश में चलाए जा रहे सर्व शिक्षा अभियान जैसे कार्यक्रमों के तहत सरकार भी काफी कदम उठा रही है, लेकिन ज्यादा सफ़लता मिलता हुआ नहीं दिख रहा हैं।
भारत का शिक्षा के मामले में पिछड़ने का प्रमुख कारण लैंगिक असमानता,गुनवतापूर्ण शिक्षा का न मिलना, गाँव में उच्च शिक्षा का न प्राप्त करना, ज्यादा अनपढ़ो की संख्या होना, ग़रीबी और भुखमरी हैं। इसी वजह से बिहार, झारखंड, उत्तराखंड आदि जैसे राज्य जनसंख्या के हिसाब से साक्षरता में बहुत पीछे। सरकार को इन सभी कारणों को ध्यान में रखना होगा ताकि साक्षरता दर सुधर सके। देश के वर्तमान और भविष्य दोनों को बढ़िया करने के लिए साक्षर होना बहुत जरूरी हैं। सरकार द्वारा बनाया गया नई शिक्षा नीति साक्षरता दर सुधारने में कारगर साबित हो सकता हैं लेकिन इसके लिए इस नीति को जमीन पर वयवस्थित ढंग से लागू करना होगा,तब जाकर कुछ सफ़लता मिलनी की उम्मीद हैं।
शिक्षा पर भारत सरकार द्वारा सम्पूर्ण भारत के स्तर पर बड़े कदम उठाए जाएं ताकि एक बेहतर और साक्षर भारत का निर्माण हो सकें।
"साक्षर होगा इंडिया तभी तो आगे बढ़ेगा इंडिया"









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