Abhishek Kumar
गंगा में मिलने वाली सहायक नदियों में से एक सबसे बड़ी सहायक नदी यमुना है यमुनोत्री ग्लेशियर से 13000 किलोमीटर तक की यात्रा करने के बाद प्रयागराज में गंगा से संगम होता है यमुना देश की राजधानी दिल्ली से होते हुए गुजरती है आज दिल्ली में जल प्रदूषण काफी हद तक बढ़ गया है घरों से जुड़ी नालियों के गंदे पानी बड़े नालों के रास्ते यमुना में जाकर बहती है इसके अलावा फैक्ट्रियों से निकलने वाले पॉलीथिन प्लास्टिक से बचे हुए पदार्थ हैं घरों का कूड़ा कचरा अन्य चीजों को यमुना में फेंक देते हैं इतना ही नहीं लोग धर्म के नाम पर मंदिरों में होने वाली पूजा सामग्री के बचे हुए सामान को भी यमुना नदी में अर्पण कर देते हैं इसका नतीजा आज लोगों को साफ पानी मिलना मुश्किल हो रहा है| इसका कारण है यमुना नदी का पानी गंदा होना है जो समय के साथ साथ ना सिर्फ गंदा बल्कि बहुत ज्यादा जहरीला हो रहा है तथा बीमारियों का कारण भी बन रहा है|
दिल्ली में साफ पानी ना मिलने से लोगों को कई तरह की बीमारियां हो रही है जैसे किडनी , लीवर , डायरिया इत्यादि |दिल्ली में लोगों को जल बोर्ड द्वारा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट द्वारा साफ पानी होने के बाद ही मिलता है किंतु पानी इतना जहरीला हो गया है कि पानी सिर्फ 47% फीसदी ही साफ हो पाता है आज के समय पानी के गंदा होने का मुख्य कारण स्वयं हम लोग खुद ही है हम दुकान के कोई छोटी या बड़ी चीजें भी खरीदते हैं तो उनका बचा हुआ कूड़ा कूड़ेदान में ना डाल कर आसपास की जगह पर फेंक देते हैं जिसका कारण है यह नालियों के जरिए यमुना के पानी को प्रदूषित करती है देश की राजधानी दिल्ली में अब तक लोगों ने जल बोर्ड को 7 महीने के भीतर 23 हजार से ज्यादा शिकायतें भेजी हैं देश में यमुना तथा गंगा नदी के पानी को साफ करने के लिए नमामि गंगे से लेकर गंगा रिसर्च सेंटर तक बनवाए गए किंतु पानी साफ होने की बजाय और भी प्रदूषित हो रहा है|







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