भारत में अक्सर पोषण की कमी और बेरोज़गारी दोनों ही मुद्दे एक साथ खड़े दिखाई देते हैं। लेकिन एक छोटी-सी अवधारणा इन दोनों चुनौतियों का समाधान बन सकती है — माइक्रो-ग्रीन खेती।
माइक्रो-ग्रीन क्या हैं?

ये छोटे-छोटे पौधे होते हैं जिन्हें अंकुर निकलने के 7–14 दिन के भीतर ही काट लिया जाता है।
इनमें विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा सामान्य सब्ज़ियों से कई गुना ज़्यादा होती है।
पालक, मूली, सूरजमुखी, मेथी, सरसों और मटर जैसी कई फसलों को माइक्रो-ग्रीन के रूप में उगाया जा सकता है।
भारत में माइक्रो-ग्रीन की ज़रूरत क्यों?

- कुपोषण से लड़ाई:
ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में पोषण की कमी एक बड़ा संकट है। माइक्रो-ग्रीन सस्ती और तेज़ पोषण स्रोत बन सकते हैं। - कम जगह और कम पानी में खेती:
इन्हें छत, बालकनी या छोटे ग्रीनहाउस में भी उगाया जा सकता है। परंपरागत खेती की तुलना में बहुत कम पानी चाहिए। - रोज़गार और उद्यमिता:
युवाओं और महिलाओं के लिए यह कम लागत वाला व्यवसायिक अवसर बन सकता है। छोटे पैमाने पर भी मुनाफा कमाया जा सकता है। - शहरी खेती का विस्तार:
भीड़भाड़ वाले शहरों में छतों और अपार्टमेंट्स की खाली जगह का इस्तेमाल करके स्थानीय सप्लाई चेन मजबूत हो सकती है।
बाधाएँ और चुनौतियाँ

जागरूकता की कमी: अधिकतर लोगों को माइक्रो-ग्रीन के बारे में जानकारी ही नहीं है।
मार्केटिंग नेटवर्क का अभाव: किसान या उद्यमी इसे बेचने के लिए बाज़ार से कैसे जुड़ें, यह बड़ा सवाल है।
संरक्षण की दिक्कतें: जल्दी खराब होने के कारण इन्हें सुरक्षित रखना चुनौती है।
नियमन और मानक: गुणवत्ता, स्वच्छता और पैकेजिंग के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश की कमी है।
संभावनाएँ और आगे का रास्ता

- स्कूल और आंगनवाड़ी में शामिल करना: बच्चों को पौष्टिक आहार देने का सबसे सस्ता और असरदार तरीका हो सकता है।
- महिला स्व-सहायता समूहों को बढ़ावा: छोटे पैमाने पर महिलाएँ इसे व्यवसाय बना सकती हैं।
- स्टार्ट-अप इकोसिस्टम: माइक्रो-ग्रीन आधारित डिलीवरी, पैकेजिंग और सप्लाई चेन पर नए स्टार्ट-अप खड़े हो सकते हैं।
- सरकारी प्रोत्साहन: सब्सिडी, प्रशिक्षण और आसान ऋण देकर इस क्षेत्र को बढ़ावा दिया जा सकता है।
माइक्रो-ग्रीन खेती भारत के लिए पोषण सुरक्षा + उद्यमिता का संयुक्त रास्ता बन सकती है। यह न केवल सेहत सुधारने का साधन है, बल्कि बेरोज़गारी और शहरी खेती की चुनौतियों का भी हल हो सकती है।
- Divesh kumar singh
Bjmc 2nd year







Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.