Roushan Kumar
आप सब ने रामायण में राक्षस राज रावण के छोटे भाई कुम्भकरण के बारे में ज़रूर सुना होगा जिसे ब्रम्हा जी द्वारा निन्द्रासन प्राप्त हुआ था |आपमें से ही बहुतों ने यह भी कल्पना की होगी की उन्हें बस खाने और सोने को मिलता तो कितना अच्छा होता |आप में से ऐसे लोगों की कलयुगी कुम्भकर्ण बनने की ये कल्पना सच तो हुई मगर आपकी कल्पना बस कल्पनामात्र ही रह गई |अगर मैं आपको कहुँ की दुनिया में एक ऐसा भी व्यक्ति है जो साल के 300 दिन सिर्फ सो कर ही गुजारता है तो क्या आप विश्वास करेंगे |क्यों है न ये चौकाने वाली बात | आपके मन में बस एक ही बात चल रहा होगा की आखिर ये कैसे मुमकिन है | आखिर कैसे कोई व्यक्ति साल के 300 दिन सिर्फ सोते हुए गुज़ार सकता है | लेकिन यह बिलकुल सच है | यह सिर्फ सच ही नहीं बल्कि सौ तोला सच है | इस व्यक्ति को आपको दुनिया के किसी कोने में खोजने की ज़रुरत नहीं है बल्कि ये व्यक्ति हमारे देश के ही राजस्थान के नागौर जिले का स्थायी निवासी है | इस व्यक्ति का नाम पुरखाराम है | नागौर गांव निवासी यह व्यक्ति साल के 365 दिन सोता है | दरअसल यह व्यक्ति एक दुर्लभ गंभीर बीमारी से पीड़ित है | इसके देखभाल में लगे रहे डॉक्टरों का कहना है की यह व्यक्ति एक बेहद ही दुर्लभ गंभीर बीमारी ह्यपरसोमनिआ(Hypersomnia) से पीड़ित है | इस शख्स के परिवारवालों का कहना है की पुरखाराम के लिए एक नींद में 20 से 25 दिनों तक सोना बेहद ही आम बात है लेकिन परिजनों की परेशानी तब बढ़ जाती है जब कोई ज़रूरी काम आ जाता हो | ऐसे में पुरखाराम को उसके कलयुगी कुम्भकर्ण वाली निंद्रा से जगा पाना परिजनों एवं आस पड़ोस वालों के लिए भी टेढ़ी खीर साबित हो जाती है | इस दुर्लभ बीमारी के कारण पुरखाराम को नींद में ही खाना खिलाया जाता है | वहीं इस मामले में पुरखाराम का कहना है की वो तो जागना ही चाहते है मगर उनका शरीर उनका साथ नहीं दे पता है | कई बार तो वे अपनी दूकान चलाते वक़्त भी सो जाया करते है |
मीडिया सूत्रों के मुताबिक पुरखाराम में इस बीमारी के लक्षण 18 साल से ही दिखनी सुरु हो गयी थी | शुरुआत में वो सिर्फ 5 से 7 दिन ही लगतार सोते थे लेकिन समय के साथ उनके बीमारी की गंभीरता बढ़ती ही गई जिसे डॉक्टरों ने hypersomania बताया है | मेडिकल साइंस के मुताबिक डॉक्टरों का ऐसा मानना है की उनकी बीमारी तबतक ठीक नहीं हो सकती है जब तक उनका इलाज अच्छे तरीके से ना किया जाए | डॉक्टरों को रिपोर्ट्स के बाद भी उनके परिजनों का कहना है की उन्होंने उम्मीद नहीं खोई है | पुरखाराम की पत्नी लिछमी देवी और उनकी बूढी माँ का कहना है की अभी तक तो सब कुछ खेतीबाड़ी पर टिका हुआ है लेकिन ऐसे ही चलता रहा तो आगे चलकर उन्हें अपने पोते पोतियों की पढ़ाई कर भी सता रहा है | उनके मन में बार बार आता ये सवाल उनके लिए चिंता का सबब बन चुका है | पुरखाराम की पत्नी और माँ को उम्मीद अभी भी बची हुई है | उनका कहना है की पुरखाराम जल्दी ही इस दुर्गम गंभीर बीमारी से ठीक हो जाएँगे |
पुरखाराम के दोस्त उन्हें मजाकिया लहजे में कुम्भकर्ण या कलयुगी कुम्भकर्ण भी कह कर बुलाते है |







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