Parth Singh
सफलता एक ऐसा मुकाम, जिसे पाना तो मुश्किल है लेकिन उसपे ठहरना और भी ज्यादा मुश्किल है, सफलता के मुकाम पर केवल वही लोग ठहर पाते है जिनमे अहम की भावना ना मात्र होती है।
जिस व्यक्ति में जरा सा भी अहम आ जाता है, फिर वो व्यक्ति सफलता के चोटियों से किसी बर्फ के टुकड़े की तरह लड़खड़ाता हुआ गिर जाता है।
कुछ ऐसा ही वाकया हुआ है, भारत के एक दिग्गज पहलवान के साथ, वो पहलवान जो सफलता के नशे में इतना चुर हो गया था कि उसे लोगो में अपने इज्जत से ज्यादा अपना खौफ पसंद आने लगा।
साल 2008 जगह थी बीजिंग और एक युवा पहलवान जो अपने सपनों के बेहद करीब था, भारत के करोड़ों लोगो के सपनों का भार लिए सूशील कुमार ने ओलंपिक खेलों में कास्य पदक अपने नाम किया , इसी घटनाक्रम के साथ भारत में एक नए सितारे का उदय हो चुका था , उसके बाद तो मानो सफलता का सिलसिला दर बदर चलता ही गया, भारतीय टेलीविजन जगत के चकाचौंध से भी सुशील कुमार अछूते नहीं रहे।
सफलता और प्रसिद्धि के नशे मे चूर सुशील कुमार का फिर विवादों में आने का सिलसिला शुरू हुआ, चाहे नरसिंह यादव हो या प्रवीण राणा सबने अनपे साजिश और मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाया।

इन सब विवादों के वाबजूद भी सुशील कुमार की प्रसिद्धि और लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आयी लेकिन छत्रसाल स्टेडियम में हुए हादसे ने सुशील कुमार को पूरे भारवर्ष तथा खेल जगत में एक हत्यारे कि उपाधि दे दी।
सागर राणा एक उभरता हुआ युवा खिलाड़ी जिसकी हत्या सिर्फ इस कारण कर दी गई क्योंकि उसने सुशील कुमार के खिलाफ आवाज उठाया था। हत्या करने के बाद सुशील कुमार ने भागने कि बहुत कोशिश की पर ऐसा कहते है न कानून के हाथ लंबे होते है, आज सुशील कुमार जेल में अपना वक़्त काट रहे है।
वो एक समय इस दुनिया तथा भारत के महान खिलाड़ी जरूर थे लेकिन अपने घमंड के कारण वो एक अच्छे इंसान और अच्छे मार्गदर्शक बनने में असफल रहे।







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